डेंगू का एक और मामला सामने आने से जिले में डेंगू के रोगियों की संख्या बढ़कर दो पहुंच गई है। सोमवार को कुंड निवासी पांच वर्षीय बच्चा अश्विनी बुखार के लक्षणों के साथ ट्रॉमा सेंटर में भर्ती हुआ था। एलाइजा टेस्ट होने के बाद बच्चे में डेंगू पॉजिटिव पाया गया। मलेरिया के रोगियों की संख्या भी बढ़कर 12 तक पहुंच गई है। इसी के साथ जिले में चिकनगुनिया के भी दो पॉजिटिव केस सामने आ चुके हैं। डॉक्टरों की माने तो अगले दस दिन इन सभी वेक्टर डिजिज के लिए सबसे ज्यादा अनुकूल है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जिले के सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखकर सभी स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं।
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निजी डॉक्टरों के साथ आपात बैठक
वेक्टर डिजीज नोडल अधिकारी ने हेल्थ मंत्रालय के आदेश के बाद जिले के सभी निजी और सरकारी डॉक्टरों की आपात बैठक बुलाई। बैठक में मलेरिया, डेंगृूू और चिकनगुनिया से निपटने और लोगों को जागरूक करने के निर्देश जारी किए हैं। नोडल अधिकारी डॉ. जेके सैनी ने अनुसार यदि किसी निजी अस्पताल ने जांच के नाम पर किसी भी मरीज से 600 रुपये से अधिक चार्ज किए तो उसकी लैब सील की जा सकती है। इसी के साथ मरीज में डेंगू-मलेरिया कंफर्म करने से पहले निजी डॉक्टर नोडल अधिकारी को मेल कर इसकी जानकारी देंगे। इसी के साथ यदि मरीजों को इन बुखारों के नाम पर बिल बनाने का काम किया गया तो ऐसे डॉक्टर के खिलाफ भी एपिडिमिक एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी
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कार्ड टेस्ट हो सकता है संदिग्ध
डॉ. जेके सैनी के अनुसार निजी लैब की तरफ से जो कार्ड टेस्ट कराए जा रहे हैं। उनकी रिपोर्ट संदिग्ध हो सकती है। एलाइजा टेस्ट के बाद ही मरीज में डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया की कंफर्म रिपोर्ट दी जा सकती है। मोस्ट रिलाएबल टेस्ट पीसीआर टेस्ट माना जाता है लेकिन वह रेवाड़ी के निजी और सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है। नागरिक अस्पताल में मलेरिया-डेंगू के बाद अब चिकनगुनिया के टेस्ट भी एलाइजा से किए जा रहे हैं। गौरतलब है कि नागरिक अस्पताल में इसके लिए प्रतिदिन करीब तीस मरीज पहुंच रहे हैं। पांच दिन के बाद ही मरीज का एलाइजा टेस्ट किया जाता है।
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घबराएं नहीं, सरकारी अस्पताल में उपलब्ध है फ्री उपचार
नोडल अधिकारी डॉ. जेेके सैनी ने बताया कि केवल घर में सफाई रखकर वेक्टर डिजीज पर कंट्रोल नहीं किया जा सकता है। किसी एक मरीज में मलेरिया होने पर उसके शरीर में तीन साल तक मलेरिया का असर रहता है। इसके कारण इस मरीज को जो भी मच्छर काटता है, वह दूसरे को काटने पर उसको भी पीड़ित बना देता है। ऐसे में मलेरिया के मरीज को कम से कम 14 दिन की मेडिसिन लेनी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इन बुखार से पीड़ित मरीजों को दवाइयां से ज्यादा सही सलाह जरूरी है। कई बार गलत उपचार से स्थिति और बिगड़ जाती है।