संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। वंचित अनुसूचित जाति (डीएससी) समाज के लोगों ने प्रधान विजय सिंह इंदौरा के नेतृत्व में वीरवार को सेक्टर-1 स्थित कार्यालय पर परिवार पहचान प्राधिकरण के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला को मुख्यमंत्री नायब सैनी के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें डीएससी वर्ग की सूची से मेघवाल और कबीरपंथी शब्द हटाने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि ओएससी वर्ग में आने वाले जाटव और जटिया जाति के लोग अपने जाति प्रमाणपत्रों में मेघवाल और कबीरपंथी दर्ज करवाकर डीएससी वर्ग का अनुचित लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।
समाज के प्रतिनिधियों ने सरकार की ओर से अनुसूचित जातियों के वर्गीकरण के तहत प्रदान किए गए विशेष लाभ के लिए हरियाणा सरकार का धन्यवाद किया। समाज के लोगों ने सरकार की इस पहल की सराहना की, जिससे सामाजिक न्याय की दिशा में एक सशक्त कदम उठाया गया है।
समाज के लोगों ने ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि कबीरपंथी कोई जाति नहीं बल्कि एक धार्मिक या सामाजिक विचारधारा है, जिसे कोई भी व्यक्ति अपनाता है, लेकिन इसे जाति के रूप में प्रस्तुत करना पूरी तरह से भ्रामक है।
ऐसे में मेघवाल और कबीरपंथी शब्द को डीएससी वर्ग की सूची से हटाया जाए। जो लोग अपनी असली जाति को छिपाकर डीएससी प्रमाणपत्र बनवा चुके हैं, उनके प्रमाणपत्र रद्द किए जाएं। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
कबीरपंथी शब्द को जाति के रूप में प्रयोग करने पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से स्पष्ट परिभाषा जारी की जाए। डीएससी समाज ने आशा जताई है कि हरियाणा सरकार इस विषय में जल्द से जल्द कार्रवाई करेगी और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करेगी।
इस अवसर पर ताराचंद कोली, सुभाष सोलंकी, धर्मपाल, राजकुमार चावरिया, सज्जन बागड़ी, देशराज डाबला, रूपेश खरेरा, दिनेश कुमार, दिलीप सिंह, प्रीतम सिंह, तिलकराज, सुरेंद्र कुमार, विनोद कुमार, हरीश कुमार, कमलेश डाबला, सुरेंद्र डाबला, अशोक मौजूद थे।