फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेवाड़ी के फर्जी पॉल्यूशन सर्टिफिकेट से दिल्ली भी प्रदूषित

Tue, 15 Dec 2015 12:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/रेवाड़ी
विज्ञापन
विज्ञापन
रेवाड़ी अहीरवाल का लंदन हो न हो, लेकिन भ्रष्टाचारियों और फर्जीवाड़ा करने वालों की जन्नत जरूर है। ऐसा हम नहीं बल्कि यहां होने वाले कारनामे खुद-ब-खुद ब्यां करते हैं।
विज्ञापन


आपको यकीन नहीं होगा कि रेवाड़ी क्षेत्र में एनएच-8 पर होने वाले फर्जीवाड़े से जिले के लोग ही नहीं बल्कि राजधानी दिल्ली के शहरवासी भी प्रभावित हो रहे हैं।

हाइवे पर दिल्ली और जयपुर की ओर आने-जाने वाहनों के लिए रेवाड़ी में सैकड़ों स्थायी और अस्थायी दुकानों पर फर्जी पॉल्यूशन सर्टिफिकेट बनाए जाते हैं।

सुनने में यह भले ही अजीब लगे लेकिन है पूरी तरह सच। अमर उजाला को जब इस मामले का पता चला तो जमीनी हकीकत का पता लगाने के लिए टीम नेशनल हाइवे पहुंची और दोपहर 1:15 मिनट से 3:30 बजे तक जो सामने आया उस पर एक रिपोर्ट...
विज्ञापन

--------
 बस पचास रुपये दो, गाड़ी है पॉल्यूशन फ्री
हैवी कॉमर्शियल वाहन हों, चारपहिया या फिर कोई और दोपहिया वाहन, इन्हें पॉल्यूशन फ्री दिखाने के लिए लीगल तरीके से अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ती है लेकिन रेवाड़ी एनएच-8 पर वाहनों को पॉल्यूशन फ्री दिखाने के लिए किसी तकल्लुफ की जरूरत नहीं है।

 राजस्थान बॉर्डर पर जयसिंहपुर खेड़ा के पास खोखों और यहां तक कि रेहड़ियों पर सैकड़ों की तादाद में प्रदूषण जांच केंद्र बने हैं। चारपहिया वाहन को अगर पॉल्यूशन फ्री दिखाना है तो महज पचास रुपये और बड़े कॉमर्शियल वाहन पर इसका खर्च 100 रुपये तक आ जाता है। इतना खर्च करने के बाद किसी का वाहन चाहे जितना भी पॉल्यूशन कर रहा हो, वह आराम से पॉल्यूशन फ्री का सर्टिफिकेट हासिल कर सकता है।
---------
आखिर रेवाड़ी में क्यों फल-फूल रहा है धंधा
हम आपको यह भी बताते हैं कि रेवाड़ी में फर्जी पॉल्यूशन सर्टिफिकेट का धंधा आखिर क्यों फल-फूल रहा है। दरअसल हरियाणा में प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर की फोटो वाले होते हैं। जबकि राजस्थान में बिना फोटो वाले प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं। ऐसे में राजस्थान से हजारों की तादाद में आने वाले वाहन दिल्ली में चालान से बचने के लिए नजदीकी जिले रेवाड़ी से ये फर्जी प्रमाण पत्र बनवाते हैं।
--------
एक किलोमीटर में हो गए एक कार के चार मानक
अमर उजाला संवाददाता ने स्टिंग करते हुए एक किलोमीटर के अंतराल में पड़ने वाले पांच प्रदूषण जांच केंद्रों पर वाहन का प्रदूषण चेक कराने के लिए वाहन लगाया लेकिन चार केंद्रों में से कहीं पर भी वाहन के पॉल्यूशन की सही चेकिंग नहीं हुई। चेकिंग के नाम पर महज गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर की फोटो खींचकर खानापूर्ति हुई और कंप्यूटर से अटैच्ड प्रिंटर से पहले से ही तय स्केल के आधार पर पॉल्यूशन फ्री की पर्ची हाथ में थमा दी गई।
--------
बिना लाइसेंस खुलीं दुकानें, पानीपत के सॉटवेयर से फर्जीवाड़ा
फर्जीवाड़ा महज यहीं बंद नहीं हो जाता है। खास बात तो यह है पॉल्यूशन फ्री का सर्टिफिकेट देने वाले ठेकेदारों में से अधिकांश के पास लाइसेंस ही नहीं है। इसके अलावा जांच केंद्रों को भी बगल में परचून या चाय की दुकान खोले लोग ही संचालित करते हैं और वहीं बाकायदा साइन कर प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र को वेरिफाई भी करते हैं। सूत्रों के मुताबिक इस सब फर्जीवाड़े को पानीपत से अपलोड कराए गए एक सॉफ्टवेयर से संचालित किया जाता है।
--------
हाइवे किनारे ही जलता है इंडस्ट्रियल कचरा
एनएच-8 पर ही हाइवे किनारे बड़ी मात्रा में इंडस्ट्रियल कचरा भी जलाया जाता है। जले कचरे से उड़ने वाला धुआं इतना ज्यादा होता है कि हाइवे पर आगे चलने वाला वाहन तक दिखाई नहीं देता है। नेशनल हाइवे पर इतना सब कुछ होने के बावजूद न तो कचरा फेंकने पर रोक लगाई गई है और न ही कूड़ा जलाने पर ही किसी तरह की पाबंदी लगाई गई। कार्रवाई के नाम पर विभाग की ओर से कोई कदम न उठने पर प्रशासनिक कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में ही है।
-------
कचरा जलाने के मामले में आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी। फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वालों पर कार्रवाई पुलिस ही कर सकती है। -नवीन गुलिया, आरओ, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड
विज्ञापन


प्रदूषण जांच केंद्रों में फर्जी सर्टिफिकेट दिए जाने की जानकारी नहीं थी। जल्द ही इस मामले की जांच करके आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी।
सत्यपाल सिंह, डीएसपी, रेवाड़ी पुलिस
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें