रेवाड़ी। प्रदेश में 30 अप्रैल तक आठवीं तक के स्कूलों को बंद करने के सरकार के आदेश को चुनौती देते हुए शनिवार को प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने बैठक कर सोमवार को जिले के सभी 370 प्राइवेट स्कूल खोलने का फरमान जारी कर दिया है। वहीं प्रशासन ने भी चेतावनी देते हुए कहा है कि शासन के आदेशों के पालन के लिए प्रतिबद्ध हैं। यदि स्कूल खोले गए तो मुकदमे दर्ज कराकर मान्यता रद्द कराने की कार्रवाई कराई जाएगी।
प्रशासन का तर्क है कि सरकार ने सभी के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया है। ऐसे में पालन की जिम्मेदारी भी सभी की बनती है। वहीं निजी स्कूल एसोसिएशन का कहना है कि देशभर में राजनैतिक रैलियां व धरने प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसे में स्कूलों को ही टारगेट क्यों बनाया जा रहा है। एक ओर बाजार, मॉल व 14 अप्रैल को सभी बड़े कार्यक्रम सरकार की ओर से किए जा रहे हैं। स्कूल बंद कर जिले के निजी स्कूलों में काम करने वाले 10 हजार कर्मचारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा किया जा रहा है।
गढ़ी बोलनी रोड पर एक निजी स्कूल में जुटे स्कूल संचालक
शनिवार को शहर के गढ़ी बोलनी रोड स्थित एक निजी कूल में हरियाणा प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की जिला इकाई की बैठक हुई। अध्यक्षता प्रधान रामपाल यादव ने की एवं इसमें जिला कोर ग्रुप और ब्लॉक अध्यक्ष के सभी सदस्य मौजूद रहे। यहां सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय में कहा गया कि स्कूलों को बंद करना तार्किक नहीं है। जब देश में चुनावी रैली, किसान आंदोलन में लाखों की भीड़ आ सकती है और सारे शॉपिंग मॉल व अन्य बाजार खुले हैं तो स्कूल ही बंद क्यों किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से सभी बच्चों, अभिभावकों और अध्यापकों में रोष है। स्कूूलों में परीक्षाएं चल रही हैं, ऐसे में एकाएक स्कूल बंद करने का फैसला न्यायसंगत नहीं है। सामूहिक निर्णय लिया गया कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से अनुरोध है कि बच्चों के हित को ध्यान में रखते हुए स्कूलों को बंद न किया जाए। इस अवसर पर प्रांतीय अध्यक्ष जवाहरलाल दूहन, अनिरुद्ध सचदेवा, चौधरी रणबीर सिंह, नरेंद्र सिंह, सुरेश कुमार, योगेश तिवारी, सत्यपाल दहिया, शत्रुघ्न यादव, नवीन सैनी व जिले के सभी कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित रहे।
निजी स्कूल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रामपाल यादव ने कहा कि सरकार की ओर से लिया गया यह फैसला पूरी तरह गलत है। सभी गतिविधियां चल रही हैं तो स्कूलों को क्यों बंद किए जा रहे हैं। परीक्षाएं चल रही हैं, अचानक स्कूल बंद करने से बच्चों पर भी असर पड़ रहा है। स्कूूल बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित, ऐसे में सरकार अपना फैसला वापस लेना चाहिए।
इधर, रेवाड़ी के उपायुक्त यशेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार के फैसले का पालन कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसमें सभी को सहयोग करना चाहिए। एसोसिएशन यदि कोई बात रखना चाहती है तो उसको सरकार तक पहुंचाया जाएगा। लेकिन किसी भी कीमत पर निर्देशों की अवमानना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि सोमवार को एक से कक्षा आठ तक के बच्चे को स्कूलों में बुलाया गया तो मुकदमे दर्ज कराकर संबंधित स्कूलों की मान्यता रद्द करने के लिए लिखा जाएगा।