जाट धर्मशाला में आयोजित बैठक। स्रोत : समाज
बावल। स्थानीय यजाट धर्मशाला में समाज के लोगों की रविवार को हुई बैठक में विवाह और अन्य सामाजिक अवसरों पर बहन-बेटियों की ओर से बर्तन बांटने की परंपरा पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया।
बैठक की अध्यक्षता बावल चौरासी के प्रधान सुमेर जैलदार ने की। इसमें समाज हित से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की गई। डॉक्टर सुरेंद्र सिंह ने बताया कि पहले मृत्यु भोज या काज के समय घर में रहने वाले लोगों के लिए विशेष भोजन या परोसा दिया जाता था। अब इस प्रथा को बंद कर दिया गया है।
समाज का मानना है कि इस प्रकार की परंपराएं अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ाती हैं। विवाह और अन्य सामाजिक अवसरों पर बहन-बेटियों द्वारा बर्तन बांटने की परंपरा पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया।
वक्ताओं ने कहा कि परंपरा के नाम पर बहन-बेटियों पर आर्थिक दबाव पड़ता था। इसलिए समाज ने इसे समाप्त करने का फैसला लिया है। समाज के लोगों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम बताया।
युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश भी दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि नशा समाज और परिवार दोनों को नुकसान पहुंचाता है। इस अवसर पर सचिव संदीप सिंह, कैशियर डॉक्टर सुरेंद्र सिंह, करण सिंह, राजेंद्र, रामकिशन फौजी, सोनू मौजूद रहे।