फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rewari News: बिन साइकिल हांफ रहीं बेटियां, किराया भी नहीं मिल रहा

Sat, 08 Jul 2023 01:00 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
विज्ञापन
विज्ञापन
रेवाड़ी। संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन


रेवाड़ी। एक ओर सरकार ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी ओर कोसली क्षेत्र के करीब 15 से अधिक गांवों की बेटियां दो से तीन किलोमीटर पैदल दूरी तय कर स्कूल पहुंचने के िलए मजबूर हैं।

उन्हें सरकार की ओर से मेरी साइकिल मेरी पसंद योजना के तहत साइकिलें तक नहीं मिली हैं। उन्हें ऑटो या अन्य वाहनों से विद्यालय तक पहुंचना पड़ता है। सरकार की ओर से स्कूल आने-जाने के लिए किराया भत्ता भी नहीं मिल रहा है।  इससे बेटियां परेशान हैं। उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।
विज्ञापन


सरकार की ओर से मेरी साइकिल मेरी पसंद योजना के तहत स्कूल से दो किलोमीटर की दूरी वाले गांवों से आने वाले विद्यार्थियों को साइकिल दी जाती है। इसमें कुछ रुपये अभिभावकों व कुछ रुपये शिक्षा विभाग की ओर से दिए जाते है। ताकि छात्र-छात्राओं को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो, लेकिन कोसली क्षेत्र के अनेक गांवों में हालात कुछ अलग है। यहां की बेटियां गांव से करीब दो किलाेमीटर का सफर तय करने के बाद स्कूल पहुंच रही हैं। इस दौरान उन्हें काभी परेशानियों को सामना करना पड़ता है।
अभिभावक कई बार साइकिल व किराये की कर चुके मांग
विद्यार्थियों के अभिभावकों ने बताया कि बेटियों को साइकिल दिलाने के लिए या फिर प्राइवेट वाहनों के किराये के लिए कई बार शिक्षा अधिकारियों व प्रधानाचार्य से भी मुलाकात की है। लेकिन अधिकारियों की ओर से जल्द साइकिल या किराया उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया जाता है। पैदल सफर के कारण अभिभावकों को हर वक्त डर बना रहता है।
इन गांवों की बेटियां सबसे अधिक परेशान
गांव भड़ंगी, मुमताजपुर, कुहारड़, झौलरी, गुजरवास, गढ़ी, नया गांव, बिसोहा व खुर्शीदनगर करीब 15 गांव शामिल है। जिनकी बेटियाें को 10 वीं पास करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए दूसरे गांवों के स्कूलों में शिक्षा के लिए जाना पड़ता है। लेकिन संसाधन के अभाव में उन्हें पैदल की सफर तय करना पड़ रहा है। कई बार बेटियों ने भी अधिकारियों को इस बात की शिकायत की है।
विज्ञापन

वर्जन
यह मामला संज्ञान में है। आटो चालकों से किराये का इस्टीमेट लेकर प्रस्ताव बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही आटो या अन्य वाहनों के लिए बेटियों को किराया मिल सकेगा।
-शिवराज सिंंह, प्राचार्य

सभी प्राचार्यों को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। बेटियों को मिलने वाली हर सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
मेरे संज्ञान में आते ही सभी प्राचार्य को पत्र लिखा है।
-राजेंद्र शर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी नाहड़
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें