रेवाड़ी। वर्षों से चली आ रही परंपरा के तहत पुत्र की पिता के शव को कंधा देते हैं और मुखाग्नि देकर अंत्येष्टि करते हैं लेकिन जिले के गांव मूंदी निवासी दिव्या शर्मा उर्फ अनु ने अपने रिटायर्ड अध्यापक पिता पवन कुमार शर्मा के निधन पर उनके शव कंधा दिया और श्मशान में मुखाग्नि देकर पिता का अंतिम संस्कार किया। इसके साथ ही अन्य क्रियाकलाप किया।
परिजनों ने बताया कि 5 दिसंबर को दिव्या के पिता का स्वर्गवास हो गया था। उनका कोई भाई नहीं है। इसके बाद दिव्या के ससुरालजनों से इजाजत लेकर उसके पिता के अंतिम संस्कार का कर्मकांड बेटी से कराया गया। मंगलवार को सामाजिक रीति-रिवाज के अंतर्गत दिव्या को पगड़ी भी पहनाई गई। दिव्या शर्मा ने कहा कि अब बेटी और बेटे में कोई फर्क नहीं है। मैंने बेटी होकर वह सभी काम किए जो कि आज के समाज में एक बेटा करता है। मैं चाहती हूं कि सभी बेटियां अपने आप को कमजोर ना समझें और समाज भी अब बेटी और बेटे में भेदभाव न रखे। मैंने यह सब काम किया ताकि भविष्य में कोई गर्भ में अपनी बेटियों की हत्या न करे। एक बेटी अपने घर के साथ-साथ अपने ससुराल का घर भी संभालती है, इसलिए मुझे बेटी होने पर गर्व है। उन्होंने बताया कि मैंने अपने पिता की इच्छा को पूरा किया है, क्योंकि वह चाहते थे कि मेरे मरने के उपरांत मेरी बेटी ही तमाम क्रियाकलाप करें। इसकी चर्चा पूरे क्षेत्र में है।