हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग की गलती के कारण प्रदेश भर के दस लाख से अधिक नौजवानों के कागजातों में सेंध लग सकती थी। आयोग की तरफ से मई में ग्रुप सी और ग्रुप डी श्रेणी की नौकरियों के लिए होने वाले कॉमन एलीजिबिलिटी टेस्ट के लिए जो लॉगिन पोर्टल शुरू किया था, उसमें भारी लापरवाही बरती गई थी। लॉगिन पोर्टल पर युवाओं की तरफ से जो कागजात अपलोड किए गए थे, उनको आसानी से कोई भी डाउनलोड कर सकता था।
रेवाड़ी निवासी दो युवकों की नजर जब इस खामी पर पड़ी तो उन्होंने तुरंत बोर्ड व सिक्योरिटी सिस्टम देखने वाली एजेंसियों को सूचित किया। उपायुक्त अशोक कुमार गर्ग से भी मुलाकात करके सरकार तक यह जानकारी पहुंचवाई। तब कहीं जाकर अब लॉगिन सिस्टम को सुरक्षित किया गया है। युवकों का कहना है कि अगर वह यह जानकारी पहले लीक कर देते तो साइबर ठग लाखों बच्चों के कागजातों का दुरुपयोग कर सकते थे।
इसी दौरान उन्होंने पाया कि पोर्टल का सिक्योरिटी सिस्टम बेहद कमजोर है। कोई भी पोर्टल खोलकर किसी के भी कागजातों को डाउनलोड कर सकता था। ऐसा करने पर कोई लॉक ही नहीं था। पोर्टल पर करीब दस लाख युवा अपने दसवीं, बारहवीं, ग्रेज्युएशन, जाति प्रमाण पत्र सहित अन्य कागजात अपलोड कर चुके थे। साइबर ठगों को अगर इसकी जानकारी मिल जाती तो वह किसी के भी कागजातों का दुरुपयोग कर सकते थे।
रविंद्र और चिराग उसी समय काम में जुट गए। सबसे पहले उन्होंने कंप्यूटर एमरजेंसी रिस्पोंस टीम ऑफ इंडिया को सूचित किया। ये एजेंसी देशभर में साइबर सिक्योरिटी को देखती है। इसके साथ ही कर्मचारी चयन आयोग को भी मेल भेजी गई कि वह अपना सिक्योरिटी सिस्टम ठीक करें।
इसके बावजूद भी बात नहीं बनी तो दोनों उपायुक्त अशोक कुमार गर्ग के पास पहुंचे। दोनों ने उपायुक्त को बताया कि कैसे पोर्टल पर से किसी भी आवेदक के कागजात डाउनलोड किए जा सकते हैं। उपायुक्त ने मामले की गंभीरता को समझा तथा अपने स्तर पर सरकार तक बात पहुंचाई। इस पूरी मेहनत का असर हुआ और अब लॉगिन पोर्टल को सिक्योर कर दिया गया है।
अधिकारी का वर्जन
मामले को लेकर दो युवक आए थे। मैंने उनसे शिकायत लेकर सरकार व बोर्ड को भिजवा दी थी। अब सिक्योरिटी सिस्टम बेहतर हो गया है तो यह अच्छी बात है। दोनों जागरूक युवाओं ने अपने कर्तव्य का निर्वहन किया। इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं। -अशोक कुमार गर्ग, उपायुक्त