-फोटो 55 : अनाजमंडी पांडूशिला पर शांति धारा के बाद भगवान का अभिषेक करते श्रद्धालु। स्रोत समाज
बहादुरगढ़। दिगंबर जैन समाज के पर्युषण महापर्व चल रहे हैं। शहर के दिगंबर जैन मंदिरों में दशलक्षण मंडल विधान की पूजा मंदिरों में श्रद्धालुओं की ओर से की जा रही है। पर्युषण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म की पूजा श्रद्धालुओं द्वारा की गई। शांतिधारा पश्चात महाआरती में श्रद्धालुओं ने उत्साह से भाग लिया।
पंडित दीपक जैन ने बताया कि मान, अहंकार व कषाय का मर्दन करना ही मार्दव धर्म है। संसारी प्राणी अनादिकाल से मान और अपमान के झूले में झूलता आया है। मान की भावना विवेक को नष्ट कर देती है। अहंकार पर विजय जीवन यात्रा का प्रथम सोपान है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के अनुसार विनय के बिना परमात्मा को नहीं पाया जा सकता, मान को त्यागकर, हाथ जोड़कर और अहंकार को छोड़कर जो जीते हैं उनके पास ही होता है विनय।
मार्दव धर्म कहता है कि छोटा बनकर जीना है। उत्तम मार्दव धर्म जीवन को सुगंधित करने की सीख देता है। वहीं जैन समाज के प्रधान सुनील जैन ने बताया कि यह कार्यक्रम 10 दिनों तक चलेंगे। 7 सितंबर तक क्षमावाणी पर्व मनाया जाएगा। संवाद