सरकारी सिस्टम में साइबर क्राइम से निपटने के लिए एक्सपर्ट नहीं होने का नतीजा यह है कि रेवाड़ी पुलिस 2013 से 18 के बीच आईटी फ्रॉड से संबंधित महज पांच मामले हल कर पाई है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार की ओर से बड़े पैमाने पर आईटी उपयोग को बढ़ावा देने की बात कही जाती है तो आईटी से होने वाले नुकसान से निपटने के लिए तैयारी क्यों नहीं कर पाई। ऐसा नहीं है कि प्रयास नहीं हुए, लेकिन यह प्रयास पंचकूला व गुरुग्राम से आगे नहीं बढ़ सके। प्रदेश के सभी जिलास्तर पर एक साइबर क्राइम थाना खोलने की बात जुलाई 2017 में कही गई थी, लेकिन रेवाड़ी में यह सिरे नहीं चढ़ पाया है। एक आरटीआई के माध्यम से मिली जानकारी के अनुसार जिला के 12 पुलिस थानों में बीते 5 सालों में कुल 28 मुकदमे एटीएम कार्ड बदलकर रुपये निकलवाने जैसे आईटी फ्रॉड के दर्ज किए गए, लेकिन पुलिस महज पांच मामलों को ही हल कर पाई है। वहीं मॉडल टाउन टाउन व महिला थाना पुलिस एक भी मुकदमे का हल नहीं कर पाई है। सभी जानकारी आरटीआई के माध्यम से जुटाई गई।
बीते सालों में देखा गया है कि बड़े गैंगस्टर भी अपनी बात कहने का बड़ा माध्यम सोशल मीडिया को बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर धमकी आदि पोस्ट कर अपराध के बाद अपनी सक्रियता दिखाते है।इसके अलावा कंप्यूटर कोर्स, डॉक्यूमेंट टेंपरिंग, हैकिंग, अश्लील पोस्ट, फेलियर इन कंप्लायंस, फर्जी डिजिटल सिगनेचर, गोपनीयता भंग करना, ईमेल हैकिंग, वेबसाइट हैकिंग, नेट बैंकिंग फ्रॉड, साइबर स्टॉकिंग, साइबर डिफॉर्मेशन, डाटा चोरी, ऑनलाइन फ्रॉड फिशिंग, ईमेल्स, डेबिट कार्ड ,एटीएम क्रेडिट कार्ड फ्रॉड इत्यादि साइबर क्राइम के तरीके से लोगों को ठगा जा रहा है।
स्पेशल ट्रेनिंग देकर करेंगे कमी पूरी : पुलिस अधीक्षक
पुलिस अधीक्षक नाजनीन भसीन ने बताया कि जिले में अधिकारियों की बैठक के दौरान साइबर सेल को मजबूत करने के लिए कहा गया है। पुलिस भर्ती में बीटेक की पढ़ाई कर चुके युवा भर्ती हुए हैं। इन लोगों को स्पेशल ट्रेनिंग देकर साइबर क्राइम में लगाया जाएगा। रेवाड़ी में हाल ही में मजबूत साइबर सेल काम कर काम कर रही है। कई मामलों का समाधान किया गया है