झोलाछाप बने डॉक्टर भ्रूण लिंग जांच की मुख्य धुरी
रेवाड़ी।
दक्षिण हरियाणा में झोलाझाप भ्रूण लिंग जांच में मुख्यधुरी हैं। यह बात पीसी-पीएनडीटी की हुई कार्रवाइयों के आंकड़ें बयां कर रहे हैं। इनमें 80 फीसदी ऐसे ही लोग पाए गए। एक आंकडे़ के अनुसार जिले में एक हजार से अधिक गैर रजिस्टर्ड डॉक्टर गली कूचों में अपनी दुकानें चला रहे हैं। रेवाड़ी शहर में करीब 200, धारूहेड़ा में 200, बावल में 150, कोसली में 100 एवं पंचायतों में करीब 400 ऐसे डॉक्टर लोगों को दवाइयां दे रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की मानें तो गली-कूचों में चली रही कथित डॉक्टरों की दुकानें स्वास्थ्य के साथ इंसानियत के खिलाफ भी काम कर रही है। यहां काम करने वाले डॉक्टरों की मोहल्ले के प्रत्येक घर में सीधी पहुंच होती है। इसके चलते महिलाएं इन लोगों पर जल्दी विश्वास कर लेती हैं। इसके बाद ये लोग महिलाओं को भ्रूण जांच के तरीके बताते हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन सभी का कमीशन निर्धारित होता है। इतना ही नहीं जानवरों के गैर रजिस्टर्ड डॉक्टर भी इस घिनौने कृत्य में शामिल पाए गए हैं। इतना ही नहीं ये सभी एक दूसरे से भी लगातार संपर्क में रहते हैं।
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नर्स एवं कंपाउंडर भी पाए गए शामिल
25 अक्तूबर 2017 को महेंद्रगढ़ के नांगल चौधरी में स्वास्थ्य विभाग एवं पुलिस की ओर से रेड की गई थी। यहां पर भी एक झोलाछाप डॉक्टर एक पुरानी मशीन खरीदकर भ्रूण जांच में संलिप्त पाया गया था। 10 अक्तूबर को महेंद्रगढ़ के रिवासा में गैर रजिस्टर्ड डॉक्टर, 1 सितंबर को सतनाली में हुई रेड में नर्स एवं कंपाउंडर, गुहाना में हुई रेड में कंपाउंडर, 23 जुलाई 2017 को राजस्थान के झुंझनू के बुड़ाना गांव में भी ऐसा ही डॉक्टर भ्रूण जांच करता पकड़ा गया था। इसके अतिरिक्त 27 अप्रैल को गुरुग्राम, 13 फरवरी को कोटपूतली, 06 फरवरी 2017 को अलवर में हुई कार्रवाई में भी गैर रजिस्टर्ड डॉक्टर मीडिएटर की भूमिका में पाए गए थे। उल्लेखनीय है कि एक केस में इनकों 15-20 हजार रुपये मिल जाते हैं।
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शिव-पार्वती की ओर इशारा कर बताया जाता है बेटा-बेटी
गैर रजिस्टर्ड डॉक्टर जहां बिचौलिए की भूमिका निभाते हैं। वहीं कुछ लोग भ्रूण जांच के अजीबो-गरीब तरीके निकालते हैं। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक के अनुसार शहर में एक जगह पर महिला डॉक्टर द्वारा जांच कर उसे भेज दिया जाता था। गर्भवती महिला को वह अपने रिश्तेदार डॉक्टर के यहां भेजती थी। वहां पर डॉक्टर महिला को सामने लगी शिव-पार्वती की ओर इशारा कर लिंग बता देता था। स्वास्थ्य विभाग को पता चलने के बाद इस महिला डॉक्टर ने स्वयं ही अपनी मशीन सील करा दी। उल्लेखनीय है कि रेवाड़ी जिले में कार्रवाई के डर से 63 में से 30 लोग स्वयं अल्ट्रासाउंड मशीन सील करा चुके हैं। जिले में हाल मेें 33 अल्ट्रासाउंड मशीन काम कर रही हैं।
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2015 में शर्मसार हो चुका है जिला
वर्ष 2015 में रेवाड़ी जिला प्रदेश में ही नहीं देश भर में शर्मशार हो चुका है। जनवरी 2015 में जिले का लिंगानुपात 1000 के मुकाबले 670 दर्ज किया गया था। जो देश भर में निम्नतम स्तर पर था। इसके बाद जिले में पीसी-पीएनडीटी टीम गठित कर एक के बाद एक कार्रवाई की गई, जिसके चलते लिंगानुपात में काफी हद तक सुधार हुआ है। बीते चार महीनों में लिंगानुपात में सर्वाधिक इजाफा हुआ है। अक्तूबर माह में जिले का अनुपात अभी तक का सर्वाधिक 930 दर्ज किया गया।
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वर्जन-
बीते सालों में देखा गया है कि 70-80 फीसदी गैर रजिस्टर्ड डॉक्टर भ्रूण लिंग जांच में मीडिएटर की भूमिका में पाए गए हैं। गांवों एवं शहरों में परिवारों तक पहुंच भी इनको फायदा देती है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से उच्चाधिकारियों को समय-समय पर इसकी सूचना भी दी गई है। आरएमपी डॉक्टरों पर इस तरह की कार्रवाई बेहद जरूरी थी।
डॉ सुदर्शन पंवार, सीएमओ, रेवाड़ी।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से रेवाड़ी के साथ आसपास के जिलों एवं राजस्थान तक में कार्रवाई की गई है। इसका लिंगानुपात पर सकारात्मक असर पड़ा है। यह सच है कि गैर रजिस्टर्ड डॉक्टरों को लिंग जांच में बड़ी भूमिका रहती है।
-डॉ सर्वजीत थापर, नोडल अधिकारी, पीसी-पीएनडीटी, रेवाड़ी।