फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ढाबों और दुकानों पर बिक रहे सस्ते पेट्रोल व डीजल से हादसे का अंदेशा

विज्ञापन
बावल रोड स्थित गोदाम में खडे टैंकर - फोटो : Rewari
विज्ञापन
दिल्ली-जयपुर हाईवे और बावल रोड स्थित करनावास, भाड़ावास रोड स्थित सुलखा व कुंड कस्बे में सड़कों के किनारे बने ढाबों और गोदामों से सरेआम पेट्रोल व डीजल का अवैध कारोबार चल रहा है। इस खेल में रिफाइनरी के चालक भी शामिल हैं। अमर उजाला के स्टिंग ऑपरेशन में यह खुलासा हुआ है। जिले के विभिन्न स्थानों पर बेचे जाने वाले पेट्रोल व डीजल की जानकारी पुलिस के आला अधिकारियों को भी है। हालांकि महज खानापूर्ति के लिए कभी-कभार पुलिस की रेड होती है, लेकिन इस अवैध कारोबार पर नकेल नहीं कसी जा सकी है।
विज्ञापन

चिंताजनक बात तो यह है कि आसपास के इलाके में तेल की तीन रिफाइनरी करीब पांच किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई हैं। यदि कोई अग्निकांड हुआ तो होने वाली तबाही का अंदाजा लगाया जा सकता है। दिल्ली-जयपुर हाईवे व बावल रोड, सुलखा व कुंड रोड पर ढाबों की भरमार है। इनमें कुछ ढाबे तेल की कालाबाजारी कर रहे हैं। हकीकत का पता लगाने के लिए अमर उजाला टीम ने अपना एक डमी ग्राहक ढाबों और गोदामों में पेट्रोल खरीदने के लिए भेजा। वहां मौजूद कर्मचारी ने कहा- यहां चार-पांच लीटर तेल नहीं मिलेगा। कम से कम 50 लीटर की बात करिए। काफी बातचीत के बाद 250 रुपये का पेट्रोल दिया।
रिफाइनरी के टैंकर चालकों की मिलीभगत
तेल की इस कालाबाजारी में रिफाइनरी के टैंकर चालक भी शामिल हैं। अधिकांश चालक आसपास के गांवों से संबंधित है। यहां आने वाले टैंकर चालक रोज सुबह पहले से तय ठिकाने पर पहुंचते हैं। यहां टैंकर के ऊपरी हिस्से में पाइप डालकर 25 से 30 लीटर तेल निकाल देते हैं। कमाल की बात तो यह है कि जो डीजल-पेट्रोल आप 68 से 75 रुपये प्रति लीटर खरीद रहे हैं, उसे ये लोग महज 35 से 40 रुपये लीटर में खरीदते हैं। इसके बाद प्रति लीटर 20 से 30 रुपये मुनाफा कमाते हैं। सस्ते के चक्कर में लोग भी इनके झांसे में आ जाते हैं। यही वजह है कि इनका धंधा खूब चल रहा है।
विज्ञापन

राजस्थान में करते हैं सप्लाई
तेल का अवैध कारोबार करने वाले लोग पेट्रोल व डीजल का अधिकांश हिस्सा राजस्थान के समीपवर्ती अलवर जिले के भिवाड़ी, बहरोड, तिजारा, किशनगढ़ बास, मुंडावर व अलवर सहित अन्य स्थानों पर सप्लाई करते हैं।
कुछ लोग बनाते है डीजल
तेल का अवैध कारोबार करने वाले कुछ लोग यहां नकली डीजल बनाने का कार्य भी करते हैं। एक ड्रम मिट्टी के तेल से डीजल बनाने के लिए करीब दस से पंद्रह लीटर डीजल को एक बड़े ड्रम में रखकर उसमें सॉल्वेंट, ब्लीचिंग पाउडर व क्रेमोकेनिया पाउडर मिलाया जाता है। कुछ देर में घोल बन जाने के बाद उसे ड्रम में उड़ेल देते हैं। पाइप और मिक्सिंग मशीन से उसे मिट्टी के तेल में अच्छी तरह मिलाया जाता है।
क्या कहते हैं अधिकारी
डीएसपी हंसराज ने बताया कि पेट्रोल और डीजल की कालाबाजारी का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। हालांकि कई बार पुलिस ने तेल की कालाबाजारी करने वालों पर छापे मार मुकदमे दर्ज किए हैं। अगर अभी ऐसी कोई बात है तो जांच के बाद कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें