रेवाड़ी। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनिल की अदालत ने साइबर ठगी के मामले में फ्रीज किए गए तीन बैंकों के खातों को सशर्त डी-फ्रीज करने के आदेश दिए हैं।
आवेदनकर्ता रिंकू ने अदालत को बताया कि वह झज्जर जिले के गांव खुड्डन में दुकान चलाते हैं और अधिकृत रिटेलर के रूप में वित्तीय लेनदेन करते हैं। जांच एजेंसी ने उनके इंडसइंड बैंक, एचडीएफसी बैंक और एसबीआई के खातों को जांच के दौरान फ्रीज कर दिया था।
रिंकू ने कहा कि वह इस मामले में आरोपी नहीं बल्कि गवाह हैं और 10 अप्रैल को उसका बयान दर्ज किया जा चुका है। बैंक खाते बंद होने से दुकानदारी प्रभावित है और परिवार के पालन-पोषण में दिक्कत आ रही है। उन्होंने अदालत से खातों को डी-फ्रीज करने का आग्रह किया।
वहीं शिकायतकर्ता पक्ष ने इस आवेदन का विरोध करते हुए कहा कि साइबर ठगी की रकम का कुछ हिस्सा रिंकू के खातों में ट्रांसफर हुआ था। अब तक केवल 55 हजार रुपये की रिकवरी हो पाई है।
जांच एजेंसी ने भी अदालत में जवाब दाखिल कर कहा कि संबंधित खाते फर्स्ट लेयर बेनिफिशियरी हैं और पूरे मामले की जांच अभी जारी है। ऐसे में खातों को डी-फ्रीज करना जांच को प्रभावित कर सकता है।
7 मई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि बैंक खाते फ्रीज करने का उद्देश्य विवादित राशि को सुरक्षित रखना होता है लेकिन किसी व्यक्ति के व्यावसायिक खातों को अनिश्चित समय तक बंद रखना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी माना कि जांच एजेंसी और शिकायतकर्ता के हितों की सुरक्षा जरूरी है।
अदालत ने रिंकू के तीनों बैंक खातों को डी-फ्रीज करने की अनुमति देते हुए शर्त रखी कि उसे 2 लाख 24 हजार रुपये का इंडेम्निटी बॉन्ड और समान राशि की एक जमानत पेश करनी होगी। साथ ही उसे अदालत को यह भरोसा देना होगा कि जरूरत पड़ने पर वह संबंधित राशि जमा करेगा और बिना अनुमति बैंक खाते बंद नहीं करेगा।