रेवाड़ी। नाहड़ सीएसची में कार्यरत स्टाफ नर्स नमिता रानी ने खुद और परिवार के पांच सदस्य कोरोना पॉजिटिव होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और सभी ने कोरोना को हराया। नमिता खुद लोगों के कोरोना टेस्ट करते हुए पॉजिटिव हो गई, मगर उन्होंने धैर्य रखते हुए 14 दिन आइसोलेट होते हुुए इलाज लिया और फिर दोबारा से सैंपलिंग कार्य में जुट गई हैं। वह अभी तक पांच हजार से अधिक सैंपल ले चुकी हैं।
नाहड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले पांच वर्ष से स्टाफ नर्स के पद पर तैनात नमिता अपने काम को प्रधान मानती हैं, बतौर नमिता ड्यूटी के रूप में जनसेवा का मौका मिला है, यह अपने आप में बड़ी बात है। नमिता ने बताया कि गत वर्ष से जिला रेवाड़ी में कोरोना की दस्तक के बाद से ही उनकी ड्यूटी कोरोना सैंपलिंग में लगी हुई है। वह अब तक लगभग पांच हजार लोगों के सैंपल ले चुकी हैं। इस बार कोरोना की लहर ज्यादा खतरनाक है। 26 अप्रैल को ड्यूटी करके घर गई तो अचानक तबीयत बिगड़ गई और जुकाम, खांसी के साथ बुखार आ गया। उन्होंने अगले दिन जब रैपिड टेस्ट कराया तो वे पॉजिटिव पाई गईं। हौसला नहीं खोया और घर पर आइसोलेट हो गई। दो दिन बाद बेटी जिया और बेटा क्रिश का टेस्ट किया गया तो वे भी पॉजिटिव निकले। दस सदस्यों का संयुक्त परिवार है, ऐसे में उनकी बहन और दो बच्चे भी साथ रहते हैं। वे भी पॉजिटिव हो गए।
पति भी आइसोलशन वार्ड में दे रही ड्यूटी
बतौर नमिता पति वीरेंद्र सिंह भी स्वास्थ्य संस्थान में काम करते हैं और आइसोलेशन वार्ड में तैनात हैं, लेकिन पति को ड्यूटी पर जाने से नहीं रोका। परिवार के सभी पांच सदस्यों को सही उपचार दिया और स्वयं भी उपचार लेकर स्वस्थ हो गई। 10 दिन बाद ही 6 मई को दोबारा से नाहड सीएचसी में ड्यूटी पर पहुंचकर सेवा शुरू कर दी। एक ही मकसद है कि किसी तरह कोरोना को हराकर लोगों को सुखद अहसास कराया जाए।