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आईजीयू के सहायक प्रोफेसर की कोरोना से मौत के बाद मां ने भी तोड़ा दम

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रेवाड़ी। करीब एक सप्ताह पहले इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (आईजीयू) मीरपुर में रोहतक निवासी बतौर सहायक प्रोफेसर (रिसोर्स पर्सन) डॉ. जितेंद्र राठी की कोरोना से मौत के बाद बुधवार को उनकी मां ने भी दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि राठी की मौत के बाद मां सदमे में थी।
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बता दें कि डॉ. राठी अपने पीछे एक ढाई साल का इकलौता बेटा छोड़कर गए हैं। राठी की मौत के बाद पूरी आईजीयू परिवार में शोक छाया हुआ है। वहीं दर्दनाक मौत से ऐसे लोगों को भी सबक लेने की जरूरत है, जो कोरोना को कुछ नहीं समझकर दूसरे लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। कोरोना का असली दर्द राठी की मां से बेहतर कोई नहीं बता सकता था, वहीं अब ढाई साल के बेटे के सिर से पिता का साया ही कोरोना ने छीन लिया।
शिक्षक देंगे एक-एक दिन का वेतन
डॉ. राठी आईजीयू में अनुबंध आधार पर कार्यरत थे, ऐसे में असमय मौत के चलते सभी शिक्षकों ने एक-एक दिन का वेतन देकर सहायता की योजना बनाई है। वहीं कुछ शिक्षकों की ओर से दो-दो दिन का वेतन भी दिया जाएगा। बता दें कि डॉ. राठी की पत्नी भी पीएचडी हैं। बता दें कि आईजीयू की रजिस्ट्रार सहित करीब 10 लोग पॉजिटिव पाए जा चुके हैं। भूगोल विभाग में भी कई अध्यापक व कर्मचारी संक्रमित हो चुके हैं।
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विवि में आधे ही शिक्षक आ सकेंगे
नॉन टीचिंग स्टाफ को विवि में 50 प्रतिशत बुलाने के फैसले के बाद बढ़ते संक्रमण को देख अब प्रोफेसर व सहायक प्रोफेसर की संख्या भी आधी कर दी गई है। विवि के अनुसार बढ़ते संक्रमण को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। अब 50 प्रतिशत शिक्षक ही विवि बुलाए जाएंगे, अन्य घर से ही ऑनलाइन कक्षाएं लेंगे।
वर्जन
कोविड के चलते चारों तरफ हालात खराब हैं। डॉ. जितेंद्र राठी के बाद उनकी मां की मौत से विवि में शोक का माहौल है। विवि कैंपस में सभी सावधानी बरती जा रही हैं। वहीं डॉ. राठी की सहायता के लिए एक-एक दिन का वेतन देने की योजना बनाई गई है। वहीं प्रयास रहेगा कि उनकी पत्नी को भी नौकरी मिल सके।
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- प्रो. एसएस चाहर, डीन एकेडमिक अफेयर
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