फोटो 11: सोनीपत की गुड़ मंडी स्थित श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पूजा अर्चना करती महिलाएं
सोनीपत। श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर गुड़ मंडी में शनिवार को दसलक्षण महापर्व के अंतिम दिन को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर 20 शांति धाराएं की गईं और शांति मंत्र का उच्चारण किया गया। महिला जैन मिलन सोनीपत की ओर से भक्तामर महामंडल विधान का आयोजन किया गया।
पं. संजय शास्त्री ने कहा कि उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म जैन दर्शन का एक सिद्धांत है जो आत्मा की विकास के लिए शारीरिक मानसिक और आध्यात्मिक संयम पर बल देता है न कि केवल यौन नियंत्रण पर। यह अपने इंद्रियों पर विजय प्राप्त करने और सभी सांसारिक आकर्षणों से ऊपर उठकर स्वयं को आत्मा के रूप में पहचान का मार्ग है।
मधु जैन, शशि जैन, निशा जैन, सुनीता जैन ने कहा कि इस धर्म को धारण करने से मनुष्य मुक्ति और शांति प्राप्त करता है। इसका मुख्य उद्देश्य आत्मा की शुद्धता और मुक्ति की प्राप्ति है।
मुकेश जैन ने कहा कि उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म आत्मा को संसार के बंधनों से मुक्त करने का मार्ग है। यदि मनुष्य संयम से रहे तो समाज की विकृतियां निश्चित रूप से दूर हो सकती है। भोग विलासता को छोड़कर मनुष्य को आत्मा में लीन होना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है। कार्यक्रम में सरिता जैन, संतोष जैन, अनु जैन, राज जैन, शीला जैन, रोशनी जैन, जयकुमार जैन, जगदीश जैन भी मौजूद रहे।