संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। हरियाणा कला परिषद एवं भरतमुनि कला केंद्र की ओर से आयोजित तीन दिवसीय नाट्य उत्सव के दूसरे दिन नाटक सैंया भए कोतवाल का मंचन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि राष्ट्रीय युवा पुरस्कार विजेता व नगरपालिका की उप प्रधान मंजू कौशिक रहीं।
संस्था के प्रधान मदन डागर ने बताया कि कार्यक्रम से पहले शहीद सिद्धार्थ यादव और अभिनेता मनोज कुमार के निधन पर दो मिनट का मौन धारण कर श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद मुख्य अतिथि ने नाटक सैंया भए कोतवाल नाटक का उद्घाटन किया। इसका निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी सतीश मस्तान ने किया है। लेखक प्रसिद्ध साहित्यकार बसंत सबनीस हैं।
नाटक में एक राज्य की दशा दिखाई गई है जहां के अधिकारी भ्रष्टाचार करते हैं और राजा को धोखा देते हैं। अपनी महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए अपने लोगों को अधिक से अधिक राजकीय लाभ पहुंचाते हुए भ्रष्टाचार की सभी सीमाओं को पार कर देते हैं। इसी जद्दोजहद में नाटक का नायक कोतवाल मैना से प्रेम करने लगता है और मैना उससे राजा के छपरी पलंग की मांग करती है। अंत में हवलदार जो मैना से शादी करना चाहता है, राजा को कोतवाल द्वारा उनके छापरी पलंग को चुराने की घटना बताता है। वह कोतवाल का भांडा फोड़ता है और राजा कोतवाल को मृत्युदंड देते हैं। हवलदार ने मैना से वादा किया था कि वो कोतवाल बनने पर ही मैना से शादी करेगा। हवलदार की निष्ठा और ईमानदारी देख कर राजा उसे कोतवाल की उपाधि दे देता है।
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नाटक में रामचरण ने निभाई राजा की भूमिका
नाटक में राजा की भूमिका राम चरण और मैना की भूमिका तानिया ने निभाई। हवलदार की भूमिका ललित वर्मा, सिपाही की भूमिका संजय चौधरी, संख्या की भूमिका लक्ष्मी निभाई, प्रधान की भूमिका कशिश बत्रा निभाई, कोतवाल की भूमिका जय डागर व अंकुर ने निभाई। संगीत आरती ने दिया। संचालन कवि सुधीर ने किया। इस अवसर पर रंगकर्मी मास्टर विजय शर्मा, लावण्या फाउंडेशन के सचिव झम्मन सिंह सैनी, रंगकर्मी मनोज शर्मा, एआर अकादमी से अभिषेक सैनी, सागर सैनी, करण सैनी, संतोष इंदौर आदि मौजूद रहे।