संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। एक व्यक्ति ने राजस्थान के एक अस्पताल से उपचार के लिए भर्ती होने का दस्तावेज बनवाकर तीन बीमा कंपनियों से क्लेम मांगा। इसके लिए उसने जिला उपभोक्ता आयोग का सहारा लिया। जांच में फर्जीवाड़ा का खुलासा होने पर जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार खंडूजा व राजेंद्र प्रसाद ने अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई करने के साथ ही शिकायतकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने के आदेश दिए हैं।
राजस्थान के एक अस्पताल ने जानबूझकर बीमा कंपनी से पैसा ऐंठने के लिए फर्जी कागजात तैयार किया और बीमा पॉलिसी धारक को लाभ पहुंचाने के लिए उसे अस्पताल में उपचाराधीन दिखाकर सभी औपचारिकताएं पूरी की थी। मामले में साक्ष्यों से स्पष्ट हुआ कि शिकायतकर्ता गांव जाटुसाना निवासी गजेंद्र सिंह ने एक ही समय में बीमार होने की बात कहकर तीन अलग-अलग बीमा कंपनियों से डेंगू के उपचार होने का अस्पताल से दस्तावेज तैयार करवा कर बीमा कंपनी से पॉलिसी के आधार पर क्लेम किया। क्लेम रद्द होने पर बीमा धारक ने स्वयं को उपभोक्ता आयोग में दावा किया और बीमा राशि के साथ जुर्माना व मुआवजा की मांग की थी।
उपभोक्ता आयोग ने स्पष्ट किया है कि इससे पूर्व भी यही शिकायतकर्ता 17 जनवरी 2025 को इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस से 1 लाख का पॉलिसी क्लेम प्राप्त कर चुका है। इफको टोक्यो, बजाज एलियांज और एचडीएफसी इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ लिए गए सभी शिकायतों को निरस्त किया गया। माना गया कि शिकायतकर्ता ने जानबूझकर क्लेम लेने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए हैं। जिला उपभोक्ता आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी को एफआईआर दर्ज करने की छूट दिया। आयोग ने निर्णय में स्पष्ट किया कि इस आदेश की एक कॉपी मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया दिल्ली को और राजस्थान स्टेट मेडिकल काउंसिल को नीमराना भेजने और ग्लोबल हॉस्पिटल और उसके डायरेक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया।
ऐसे हुआ था पूरे मामले का खुलासा
दो अलग-अलग दर्ज शिकायतों के आधार पर स्पष्ट हुआ कि जिले के गांव जाटुसाना निवासी गजेंद्र सिंह ने बजाज एलियांज जरनल इंश्योरेंस कंपनी और एचडीएफसी इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ जिला उपभोक्ता आयोग में साल 2023 में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। बताया था कि वह 23 अगस्त 2022 से 28 अगस्त 2022 तक डेंगू से बीमार था और इस दौरान उसने 5 दिन का उपचार ग्लोबल हॉस्पिटल रीको, नीमराना, (अलवर) से करवाया था। इस दौरान उसे हॉस्पिटलाइजेशन का बिल 75 हजार रुपये इंश्योरेंस कंपनी को पॉलिसी के अनुसार अदा करना था, लेकिन उसे बिल की राशि नहीं दी गई तो उसने क्लेम लेने के लिए बीमा कंपनी में आवेदन किया। बीमा कंपनी ने उसका यह क्लेम 6 अक्तूबर 2022 को निरस्त कर दिया था। बीमा कंपनी के जांचकर्ता अधिकारी ने पाया था कि जितना भी रिकॉर्ड है, वह गलत व भ्रामक तथ्यों पर आधारित है। इसके साथ ही यह ग्लोबल हॉस्पिटल इंश्योरेंस कंपनी की ओर से ब्लैकलिस्टेड किया जा चुका है। इसके लिए पेश की गई जांच रिपोर्ट भी फर्जी पाई गई थी।
जिला उपभोक्ता आयोग के समक्ष जब यह दोनों मामले सामने आए तो आयोग ने स्पष्ट किया कि इससे पूर्व भी ऐसे क्लेम लिए गए हैं, जिसमें फर्जी दस्तावेज तैयार कर डॉक्टर की मदद से इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम लेने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। इसके तहत उन्होंने दो शिकायत पहले भी निरस्त की थी। इतना ही नहीं ग्लोबल हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए, जिसमें मरीज के डिस्चार्ज कार्ड में कोई समरी या दवाइयां का हवाला नहीं दिया गया था। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हुआ कि उपरोक्त शिकायतकर्ता ने ही उसी समय अवधि के दौरान एचडीएफसी इंश्योरेंस कंपनी से मच्छर काटने से होने वाली बीमारी का मुआवजा देने की एक पॉलिसी ली हुई थी। इसके तहत उसने 1 लाख का क्लेम एचडीएफसी कंपनी से इस समय अवधि के दौरान का किया हुआ था।