रेवाड़ी। दक्षिणी हरियाणा की राजनीतिक राजधानी रेवाड़ी में जिला प्रमुख भाजपा का ही बनना लगभग तय है लेकिन खेमों में बंटी पार्टी में अब दौड़ अपने आदमी को जिले का पहला नागरिक बनाने की शुरू हो गई है। कांग्रेस कहीं भी दौड़ में नहीं है जबकि इनेलो की नजर भाजपा की रणनीति पर है। अभी अपने पत्ते भी नहीं खोले हैं। यानी भाजपा में पड़ी फूट और निर्दलीयों के इधर-उधर होने पर इनेलो इसका फायदा लेने के मूड में है। इधर, भाजपा नेता सक्रिय हो चुके हैं और माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री राव इंद्रजीत जिला प्रमुख बनाने में अहम रोल निभा सकते हैं। क्योंकि यहां कोसली विधायक एवं सहकारिता राज्य मंत्री बिक्रम सिंह और बावल विधायक डॉ बनवारी लाल उन्हीं के खेमे के हैं।
सूत्रों का कहना है कि इस खेमे ने 13 पार्षदों से संपर्क साध लिया है और दो दिन बाद जीते पार्षदों की मीटिंग भी बुलाने की तैयारी है। हालांकि भाजपा के पुराने नेता संगठन के कार्यकर्ता को इस कुर्सी पर बैठाने की कोशिश में है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिले की राजनीति पर सीएम हाउस तक की नजर है और कुछ नेताओं के पास संगठन के जीते पार्षदों की सूची तक पहुंच गई है। इसके अलावा भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता वीर कुमार यादव, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अरविंद यादव व जिलाध्यक्ष सतीश खोला की ड्यूटी लगाई गई है कि वह जीते निर्दलीय पार्षदों से संपर्क कर उन्हें अपने पक्ष में लाए। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर जिला प्रमुख भाजपा का बनता है तो वह संगठन का होगा या फिर राव इंद्रजीत सिंह खेमे का। यहां कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने भी यह माना है कि जिला प्रमुख भाजपा की बन सकता है। क्योंकि निर्दलीय सरकार के साथ ही जाएंगे। अमर उजाला ने भी कुछ प्रत्याशियों से बातचीत की तो उन्होंने सरकार के साथ जाने की ही बात स्वीकार की है।
हर ब्लॉक में लगाई दो-दो सीनियर नेताओं की ड्यूटी
ब्लॉक समिति प्रधान के लिए भी भाजपा ने पूरा जोर लगा दिया है। बाकायदा संगठन की ओर से हर ब्लॉक में दो-दो सीनियर नेताओं की ड्यूटी लगाई गई है कि वह जीते हुए पार्षदों को अपने पक्ष में लाए और प्रधानगी पार्टी के ही कार्यकर्ता को मिले। सूत्रों का कहना है कि जिला प्रमुख के साथ पंचायत समिति की प्रधानगी के लिए भी भाजपा ने पूरा दम लगाया है। एक वरिष्ठ नेता ने तो यहां तक कहा कि इसके लिए यदि शासन और प्रशासन के सहयोग की जरूरत पड़ी तो उनसे भी मदद ली जाएगी।
...तो वाइस चेयरमैन की कुर्सी से फंस सकता है मामला
जिला परिषद प्रमुख के लिए एससी की सीट रिजर्व होने से यहां जीत कर आई चार महिलाओं में एक का बनना तय है लेकिन मामला वाइस चेयरमैन की कुर्सी पर फंसने वाला है। क्योंकि निर्दलीय यदि भाजपा को समर्थन देते हैं तो इसके बाद वाइस चेयरमैन की कुर्सी की मांग कर सकते हैं। ऐसे में निर्दलीय उम्मीदवार किसी का भी खेल बिगाड़ और बना सकते हैं। इसी खेल पर इनेलो ने नजर गड़ाई है। यदि पहली मीटिंग में जिला प्रमुख का चयन होता है तो 18 में से 12 पार्षदों की जरूरत पड़ेगा और यदि दूसरी मीटिंग बुलाने की जरूरत पड़ी तो 18 में 10 पार्षद जिला प्रमुख चुन लेंगे। ऐसे में यदि भाजपा में कुछ गड़बड़ी दिखी तो इनेलो निर्दलीय का समर्थन कर सकते हैं या फिर ले सकते हैं। ऐसे में मामला वाइस चेयरमैन की कुर्सी पर फंसना तय है।
किसने क्या कहा:
भाजपा: जिलाध्यक्ष सतीश खोला का कहना है कि जिला परिषद चेयरपर्सन और ब्लॉक प्रधानगी पर भाजपा का ही कब्जा होगा। ज्यादातर उम्मीदवार भाजपा के ही जीते हैं। ऐसे में कहीं कोई दिक्कत नहीं आएगी। सभी वरिष्ठ नेताओं ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। मिल बैठकर प्रधानगी के लिए जीते पार्षद तय किए जाएंगे।
इनेलो: जिलाध्यक्ष सुनील यादव के अनुसार इनेलो अभी दो-तीन दिन भाजपा की रणनीति पर नजर रखेगी। भाजपा के लिए इतना आसान नहीं है कि वह जिला प्रमुख बना लें। हमारे भी पांच उम्मीदवार जीतकर आए हैं और निर्दलीयों की संख्या भी ज्यादा है। ऐसे में अभी भाजपा की रणनीति देख रहे हैं।
कांग्रेस: पूर्व मंत्री कप्तान अजय सिंह यादव व कांग्रेस के प्रदेश सचिव जवाहरलाल सचदेवा का दावा है कि चेयरमैनी की दौड़ से कांग्रेस बाहर नहीं है। कप्तान का दावा है कि रेवाड़ी हलके से कांग्रेस के तीन प्रत्याशी जीते हैं। बाकी से भी कुछ प्रत्याशी जीतकर आए हैं। ऐसे में जिला प्रमुख बनाने का पूरा प्रयास करेंगे।
विधायक बोले:
रेवाड़ी विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास का कहना है कि चेयरपर्सन भाजपा की ही बनेगी। सभी वरिष्ठ नेता मिलकर नाम तय करेंगे। यह पार्टी की जीत है। ब्लॉक समिति में भी पार्टी का ही पार्षद प्रधान बनेगा।
बावल विधायक डॉ बनवारी लाल का कहना है कि ज्यादातर उम्मीदवार भाजपा समर्थित जीते हैं। जल्द ही सभी की बैठक बुलाकर सर्व सम्मति से नाम तय करेंगे। ब्लॉक में भी ज्यादातर उम्मीदवार भाजपा के ही जीते हैं।