प्रशासन ने शहर को तीन वर्ष पहले कैटल फ्री तो घोषित कर दिया लेकिन आज भी जिले की सड़कों पर घूमते गोवंश हादसों का कारण बन रहे हैं। प्रशासन ने शहर को कैटल-फ्री बनाने की दिशा में बेसहारा गोवंश को पकड़ने के साथ उनके लिए गोशाला तक की व्यवस्था की थी। इसके बाद शहर को कैटल-फ्री घोषित कर दिया गया। फाइलों में जिला कैटल फ्री है लेकिन सड़कों पर लावारिस गोवंश प्रशासन की पोल खोल रहा है। वहीं पिछले वर्ष नगर परिषद की ओर से एक निजी कंपनी को गोवंश पकड़कर कर गौशाला में भेजने का टेंडर जारी किया था। लेकिन कुछ समय बाद कंपनी ने हाथ खड़े कर लिए थे। वहीं पिछले दिनों नगर परिषद की ओर से ठेकेदार की 50 हजार की सिक्योरिटी जब्त की गई थी। अब नगर परिषद विभाग फिर से काम शुरू करने का दावा कर रहा हैं।
एक अनुमान के मुताबिक शहर की सड़कों पर करीब 500 से भी अधिक लावारिस गोवंश घूमते हैं। इनकी संख्या कम होने की बजाय अब लगातार बढ़ती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि गर्मियों के दौरान ज्यादातर गोवंश दूध देना बंद कर देते हैं। इस कारण ज्यादातर पशुपालक अपने पशुओं को छोड़ देते हैं। दिनभर सड़कों पर घूमते पशुओं के कारण हादसे हो रहे हैं। प्रशासन ने वर्ष 2018 में शहर को कैटल फ्री घोषित किया था। सरकुलर रोड पर जगह-जगह खड़े लावारिस गोवंश के कारण वाहन चालकों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनसे दुर्घटनाएं भी होती रहती है और जाम ऊपर से लगता है।
कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद जिला प्रशासन द्वारा आनन-फानन में शहर को कैटल फ्री घोषित कर दिया गया था जबकि नप कार्यालय परिसर में भी सरेआम बेसहारा पशुओं का जमावड़ा देखा जा सकता है। शुरूआती तौर पर दिखावे के लिए प्रशासन की ओर से करीब 150 बेसहारा पशुओं को पकड़कर गोशाला और अस्थायी फाटकों में भेजा था लेकिन अब वहीं स्थिति है।
हमने 60 से ज्यादा टेंडर कर दिए है। ठेकेदार की 50 हजार की सिक्योरिटी जब्त कर ली गई हैं। जल्द से दोबारा टेंडर छोड़ा जाएगा। -पूनम यादव, चेयरपर्सन नगर परिषद ।