लेफ्टिनेंट बलिदान सिद्धार्थ यादव को पैतृक गांव भालखी माजरा में पिता सुशील यादव ने मुखाग्नि दी। गांव में सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि हुई। बलिदान की मंगेतर सानिया ने बताया कि उन्हें सिद्धार्थ यादव के बलिदान पर गर्व है। मां सुशीला देवी ने बताया कि वह देश की हर मां को कहना चाहेंगी कि वह अपने बेटे को सेना में जरूर भेजें, ताकि वह देश की सेवा कर सकें। अंतिम संस्कार में परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। जैसे तैसे आसपास के लोगों ने परिवार को संभाला।
इस दौरान ग्रामीणों की भी आंखें नम हो गई। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव के निधन पर शोक जताया है। कहा है कि भारत के मां के महान सपूत के बलिदान पर हम सबको गर्व है। देश के ऊपर सर्वस्व न्यौछावर करने वाले वीर सपूत को मेरा नमन है। बता दें कि गुजरात के जामनगर में बुधवार रात करीब 9.30 बजे भारतीय वायुसेना का फाइटर जेट जगुआर क्रैश हो गया था।
प्लेन क्रैश में रेवाड़ी के लाल फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव बलिदान हो गए थे। फाइटर जेट ने जामनगर एयरफोर्स स्टेशन से उड़ान भरी थी। इस हादसे में दूसरा पायलट घायल हुआ था। सिद्धार्थ 31 मार्च को छुट्टी पूरी कर ड्यूटी पर लौटे थे। सिद्धार्थ की 23 मार्च को सगाई हुई थी। इसी साल दो नवंबर को उनकी शादी तय हुई थी। सिद्धार्थ यादव इकलौता बेटा थे और उनकी एक बहन है। शहीद का पूरा परिवार सैनिक पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है।
सिद्धार्थ यादव के पिता सुशील यादव भी वायुसेना में थे। सिद्धार्थ ने 2016 में एनडीए की परीक्षा पास की थी और वायुसेना में फाइटर पायलट के तौर पर ज्वॉइन किया था। दो साल के बाद प्रमोशन हुआ और वह फ्लाइट लेफ्टिनेंट बने थे। पिता का कहना है कि वह चाहते थे कि उनका बेटा एयरफोर्स का सबसे बड़ा अधिकारी बनकर घर आता तो उन्हें काफी खुशी होती। मगर होने को कुछ और ही मंजूर था।
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