रेवाड़ी। बंजारा संस्था के कलाकार पिछले 35 साल से रेवाड़ी में रंगमंच को जिंदा रखे हुए हैं। हरियाणवी संस्कृति को सहेजने और रंगमंच को दिशा देने के उद्देश्य से कुछ कलाकारों ने 1988 में इस संस्था का गठन किया। 1990 में संस्था के पंजीकरण के बाद से संस्था ने नाटकों का सिलसिला शुरू किया, जो अब तक जारी हैे।
संस्था के वरिष्ठ सदस्य रंगकर्मी गोपाल शर्मा बताते हैं संस्था के कलाकारों ने रेवाड़ी ही नहीं, दिल्ली, गुरुग्राम, रोहतक, चंडीगढ़, अलवर, जयपुर जैसे शहरों में अभिनय की छाप छोड़ी है। भोंदू नाटक के 70 अधिक शो हुए हैं। समाज को जागरूक करने के लिए साक्षरता अभियान व 1995 में बाढ़ पीड़ितों की मदद के साथ एक दशक तक संगीत नाटक अकादमी के सौजन्य से बाल कलाकारों के लिए प्रशिक्षण शिविर लगाकर रंगमंच के लिए नई पौध भी तैयार की।
संस्था को मिल चुके हैं कई सम्मान
1995 में रामनगर में आयोजित राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव में संस्था ने एक साथ चार पुरस्कार जीते। अनूठे हरियाणवी हास्य-जै सुख तै चाहवै जीवणा तो भोंदू बण के रह-को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ हास्य नाटक, संस्था को सर्वश्रेष्ठ सांस्कृतिक संस्था सम्मान मिला। रंगकर्मी गोपाल शर्मा को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता एवं संजय डाबला ने श्रेष्ठ बाल अभिनेता का पुरस्कार पाकर पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया।
अभिनेता गोविंद नामदेव हैं संरक्षक
संस्था के संरक्षकों में बाॅलीवुड के अभिनेता गोविंद नामदेव अग्रणी हैं। वहीं,वरिष्ठ रंगकर्मी विजय भाटोटिया निदेशक हैं। सदस्यों में शामिल दिनेश गुप्ता, खूबराम सैनी, ऋषि सिंघल, एडवोकेट विनय सैनी, एडवोकेट जितेंद्र शर्मा, एडवोकेट ममता रानी विनोद रंजन, योगेश कौशिक विभिन्न प्रभार संभाल रहे हैं। वर्तमान पीढ़ी में विक्रांत सैनी, रविंद्र, मयंक, राघव आदि कलाकार संस्था की यात्रा को गति देने में लगे हैं।
दो दर्जन से अधिक नाटकों का मंचन किया
संस्था ने भोंदू नाटक के अतिरिक्त महाभोज, गिरगिट, कोर्ट मार्शल, शहीदों ने लौ जगाई, संक्रमण, दिवाली 62 की समेत दो दर्जन से अधिक नाटकों का मंचन किया। सभी वरिष्ठ कलाकार विभिन्न हरियाण्वी फिल्मों के साथ हिंदी फिल्मों में भी आ चुके हैं। हाल ही में विजय भाटोटिया नेतृत्व में संस्था से जुड़ी 11 नृत्यांगनाओं ने दिल्ली के कर्तव्य पथ पर सांस्कृतिक परेड में हरियाणा का प्रतिनिधित्व किया था।
कार्यक्रम में अभिनय प्रस्तुत करते बजारा संस्था के सदस्य। स्रोत : संस्था