अनाज मंडी मार्ग पर दोपहर के समय छाया प्रदूषण। संवाद
रेवाड़ी। दीपावली के बाद से बिगड़ी शहर की हवा सुधरने का नाम नहीं ले रही है। अभी तक जिला रेड जोन से बाहर नहीं आ पाया है। सोमवार को दिन के समय प्रदूषण का स्तर फिर से 300 को पार गया।
अधिकतम एक्यूआई 329 दर्ज किया गया है जो गंभीर श्रेणी में माना जाता है। ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले दिनों में ग्रैप 3 की पाबंदियां भी लग सकती हैं। निराशा की बात ये है कि अभी भी रेवाड़ी रेड जोन में है। सबसे बड़ी प्रशासन की चुनौती है कि जैसे तैसे जिले को रेड जोन से बाहर निकाला जाए।
सांस और आंखों में जलन के मरीज 30 फीसदी बढ़े
एक्यूआई अधिक होने से डायबिटीज का रिस्क बढ़ता है। साथ ही प्रदूषण सांस की बीमारियां जैसे अस्थमा, सीओपीडी और ब्रोंकाइटिस का कारण भी बन रही है। वहीं इससे आंखों की समस्यां जैसे पानी आना, आंखों में लालीपन हो सकता है। सिविल अस्पताल में सांस और आंखों में जलन के मरीजों की संख्या में 30 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है।
बहुत खराब श्रेणी में माना जाता है मौजूदा एक्यूआई
एक्यूआई 201-300 को खराब श्रेणी माना जाता है और इस दौर में जीआरएपी का स्टेज-1 लागू किया जाता है। वहीं, एक्यूआई 301 से 400 को बहुत खराब श्रेणी माना जाता है और इस स्थिति में जीआरएपी स्टेज-2 लागू किया जाता है। एक्यूआई 401-500 (गंभीर श्रेणी) में प्रदूषण होने पर जीआरएपी स्टेज-3 और एक्यूआई 450 (बेहद गंभीर) पार होने पर जीआरएपी स्टेज-4 लागू किया जाता है। जैसे-जैसे प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, हर एक स्तर पर प्रतिबंध भी कड़े होते जाते हैं।