अरावली बचाओ आंदोलन के तहत बातचीत करते लोग। स्रोत : संस्था
रेवाड़ी। अरावली बचाओ आंदोलन के तहत सुभाष चंद्र बोस पार्क में आंदोलन का शुभारंभ किया गया। पार्क से शुरू हुई जन जागृति यात्रा कुंड, मनेठी, पाड़ला, अहरोध, खोल, मंडोला, धावणा, लुहाना, सिहा, मूंदी, पिरानपुरा, चिमनावास, खोरी सहित अनेक गांवों से गुजरती हुई रविवार को रेवाड़ी पहुंची। इस दौरान अरावली को बचाने की अपील की गई।
गांव-गांव में लोगों ने यात्रा का स्वागत किया। जनसभाएं आयोजित की गईं। ग्रामीणों ने अरावली बचाओ आंदोलन को समर्थन दिया। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि अरावली की पहचान उसकी ऊंचाई या निचाई से नहीं की जा सकती।
अरावली गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली तक फैली एक पर्वत माला है। यदि इस माला से जुड़े मणियों को बिखेर दिया जाए तो वह माला नहीं रह जाती। इसी तरह केवल 100 मीटर ऊंचाई तक की पहाड़ियों को ही अरावली मानने की परिभाषा अरावली के अस्तित्व को ही समाप्त कर देगी।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि इस तरह की परिभाषा का उद्देश्य अरावली क्षेत्र को कॉरपोरेट घरानों के खनन और दोहन के लिए खोलना है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
जन-जागृति यात्रा में मनोज यादव, कैलाश चंद, राजेंद्र सिंह एडवोकेट, डॉ. पूनम यादव, हेमंत शेखावत, शेर सिंह मीरपुर, रामकुमार निमोथ, सतपाल, मास्टर लक्ष्मण सिंह, सतप्रकाश गोयल, सुनील कुमार, अनिल कुमार, पवन कुमार एडवोकेट शामिल रहे।