रेवाड़ी। सीबीएसई से मान्यता प्राप्त राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूलों में अब स्कूल मुखिया बाल वाटिका में विद्यार्थियों को नामांकन से मना नहीं कर सकेंगे। इस संदर्भ में शिक्षा विभाग मुख्यालय ने आदेश जारी कर दिया है। विभागीय अधिकारियों को अक्सर देखने में आया है कि मॉडल संस्कृति स्कूलों के मुखिया अपने स्तर पर बाल वाटिका कक्षाओं में नामांकन की सीमा और सीटों की संख्या निर्धारित की है। इसकी वजह से एंट्री लेवल पर ही विद्यार्थियों को नामांकन से वंचित किया जा रहा है, लेकिन अब मुखिया ऐसा नहीं कर सकेंगे।
विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने पत्र जारी कर डीईओ, डीईईओ, क्षेत्राधिकार के सभी विद्यालयों में विशेषकर राजकीय मॉडल संस्कृति प्राथमिक विद्यालयों और राजकीय मॉडल संस्कृति सीबीएसई से मान्यता प्राप्त विद्यालयों के मुखिया किसी भी विद्यार्थी को मना नहीं कर सकते हैं। आसपास रहने वाले प्रत्येक विद्यार्थी इसके लिए पात्र है। इसलिए उसे दाखिला दिया जाना जरूरी है।
जारी पत्र में कहा गया है कि सीबीएसई से मान्यता प्राप्त विद्यालय जिनके पास प्राथमिक विंग नहीं हैं और एसएमसी प्राथमिक कक्षाएं आरंभ करना चाहते हैं तो वह अपने डीईईओ के संज्ञान में लाकर एसएमसी प्रस्ताव अनुसार कक्षाएं संचालित करें। नई कक्षाएं शुरू करने से अतिरिक्त कमरों की मांग के संदर्भ में पहले ही बताया गया है कि स्कूल को दोहरी पारी में संचालित किया जाए। नामांकन अधिक होने पर यदि अतिरिक्त अध्यापकों की मांग उपजती है तो इस बारे में डीईईओ के माध्यम से निदेशालय को अवगत करवाया जाए, जिससे कि उचित अनुपात के अनुसार अध्यापकों की व्यवस्था की जा सके। बाल वाटिका के लिए किसी भी प्रकार की पंजीकरण फीस अथवा मासिक फीस नहीं ली जाए।
वर्जन
विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने पत्र जारी कर कहा है कि राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बाल वाटिकाओं में विद्यार्थियों को नामांकन के लिए वंचित नहीं किया जाए। ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को दाखिला सुनिश्चित किया जाए, जिससे कि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिल सके।-महेंद्र सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी रेवाड़ी।