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पूंजीपतियों लाभ पहुंचाने के लिए बनाए कृषि कानून ः अमराराम

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रेवाड़ी। कृषि कानूूूूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन सोमवार को 182 वें दिन भी जारी रहा। धरनास्थल पर समूह चर्चा व किसानों की बैठकें भी हुईं। मौसम में बदलाव के साथ ही किसानों की संख्या भी बढ़ने लगी है।
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बता दें कि दिल्ली कूच करते समय हरियाणा पुलिस ने राजस्थान के किसानों को दिल्ली-जयपुर स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद से राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के किसानों से यहीं पर अपना पड़ाव डाल दिया। यहां राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र व केरल के किसान मौजूद हैं।
समूह चर्चा को संबोधित करते हुए अमराराम ने कहा कि देश का किसान किसी भी सूरत में टकराव में विश्वास नहीं करता। पहले दिन से भी किसान केंद्र सरकार से तीनों कृषि कानूनों के गलत प्रभाव बताकर इन्हें रद्द कराने की मांग करता आ रहा है। लेकिन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के मकसद से इन्हें रद्द नहीं कर रही है। जबकि ये तीनों कृषि कानून देश के किसानों को बर्बाद करने वाले हैं। यही कारण है कि देश के इतिहास में पहली बार कोई आंदोलन इतना लंबा चला है। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार ऐसा हो रहा है कि सरकार बिना मांगें ही किसानों पर कानून थोप रही है। जबकि किसान इसका विरोध कर रहे हैं। देशभर का किसान इन कानूनों के विरोध में सड़कों पर पड़ा है, लेकिन सरकार अपनी जिद से टस से मस नहीं हो रही है। इस अवसर पर डॉ. संजय माधव, राजाराम मील, रामकिशन महलावत, ईश्वर महलावत, बच्चू सिंह शाहपुर, नवीन कुमार, किशन प्राणपुरा, अमर नेहरा व त्रिलोक सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
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