फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डेढ़ साल बाद स्कूलों में पहुंचे बच्चों के चेहरे फूल से खिले

विज्ञापन
कोरोना के नियमों का पालन करते हुए पढ़ाई करते बच्चे। - फोटो : Rewari
विज्ञापन
सरकारी व निजी स्कूलों में बुधवार से करीब डेढ़ साल बाद चौथी और पांचवीं की कक्षाएं शुरू हुई। हालांकि पहले दिन बारिश चलते स्कूलों विद्यार्थियों की संख्या कम रही, लेकिन लंबे समय के अंतराल के बाद स्कूल पहुंच रहे बच्चों के चेहरों पर उत्साह दिखाई दिया।
विज्ञापन

गौरतलब है कि सरकारी व निजी स्कूलों में नौवीं से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाई करवाने के लिए 17 जुलाई से स्कूल खोले जा चुके हैं। इसके बाद 23 जुलाई से छठी से आठवीं कक्षा के लिए स्कूल खोले गये। वहीं बुधवार से चौथी व पांचवी की कक्षाएं लगनी शुरू हुई। स्कूल जाते समय विद्यार्थियों के चेहरे पर रौनक दिखी। बारिश चलते पहले दिन स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कम रहीं। वहीं स्कूल प्रबंधन द्वारा भी बच्चों की सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए थे।
स्कूल के प्रवेश द्वार पर ही बच्चों की थर्मल स्क्रीनिंग की गई। स्कूलों में सैनिटाइजर का भी छिड़काव कराया गया। स्कूल में कक्षा के दौरान सभी विद्यार्थी मास्क पहने नजर आएं। इसी के साथ स्कूल में शारीरिक दूरी का विशेष ध्यान रखा गया। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को दोपहर का भोजन दिया जाता है। लेकिन कोरोना महामारी के चलते शिक्षा विभाग के निर्देश अनुसार मिड-डे मील नहीं दिया गया। शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार अभी स्कूल में विद्यार्थियों को दोपहर का भोजन नहीं मिलेगा। इसी के साथ स्कूल में बच्चों को पढ़ाई करवाते समय शारीरिक दूरी का भी विशेष ध्यान रखना होगा। स्कूल में एक कक्षा में 20 बच्चों को बैठाकर ही पढ़ाई करवाई जाएगी।
विज्ञापन

प्रत्येक सेक्शन को एक ऑक्सीमीटर
स्कूलों के लिए 2611 ऑक्सीमीटर स्कूलों में भेज दिए गए हैं। माध्यमिक व प्राथमिक स्कूलों में प्रत्येक एक सेक्शन को एक ऑक्सीमीटर दिया जाएगा। ऑक्सीमीटर डिजिटल डिस्प्ले वाली एक छोटी डिवाइस मशीन होती है। इसे पीपीओ यानी पोर्टेबल प्लस ऑक्सीमीटर के नाम से जाना जाता है।
जिले में बुधवार से चौथी व पांचवीं कक्षा के लिए स्कूल खुल गए हैं। सभी स्कूलों को कोरोना के नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। इसी के साथ स्कूलों में विद्यार्थियों को आने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन

-कपिल पुनिया, डीईईओ रेवाड़ी।
-----------
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें