रेवाड़ी। वकीलों को हमेशा वकालत के लिए ही जाना जाता है। जिले में कई ऐसे भी वकील हैं जो अपनी वकालत के माध्यम से आम जनता की भलाई करते हैं। एडवोकेट कैलाश चंद और एडवोकेट राजेंद्र सिंह इसी का उदाहरण हैं। एडवोकेट कैलाश चंद बच्चों की पढ़ाई का मुद्दा उठाने के लिए जाने जाते हैं। जबकि राजेंद्र सिंह एक समाजसेवी हैं और विभिन्न आंदोलनों में भाग लेते हैं। आज इन दोनों ही वकीलों ने समाज में एक नई मिसाल पेश की है।
दोनों वकील समाज में अपने किए गए कार्यों के लिए जाने जाते हैं। हर वकीलों से इनकी अलग पहचान है। एडवोकेट कैलाश चंद ने बताया कि जब वह किसी गरीब की मदद करते तो उन्हें काफी अच्छा महसूस होता है। वकालत करने से पहले ही उन्होंने सोचा था कि वह गरीबों की मदद जरूर करेंगे ताकि इससे किसी का भला हो सके। एडवोकेट राजेंद्र सिंह ने बताया कि लोगों को कानून की ज्यादा जानकारी नहीं होती है। वकालत के माध्यम से वह लोगों की मदद करते हैं और उनके मुद्दों को बढ़-चढ़कर उठाते हैं। ऐसा करने में काफी अच्छा महसूस होता है।
एडवोकेट कैलाश ने बच्चों की पढ़ाई का उठाया था मुद्दा
शहर के विकास नगर कंकरवाली निवासी एडवोकेट कैलाश चंद हमेशा समाज के मुद्दे उठाते रहे हैं। चंद ने केंद्र सरकार के राइट टू एजुकेशन को लेकर आवाज उठाई थी। दरअसल, इस कानून में एक कमी थी। पहली से ही इस कानून में विद्यार्थी को दाखिला मिलता था। ऐसे में बहुत ही कम दाखिल हो पाते थे। यह कानून निजी स्कूलों में फ्री पढ़ाई के लिए बनाया गया था। तब जाकर मामले में आवाज उठाई गई और बच्चों को लाभ मिलना शुरू हुआ। हरियाणा एजुकेशन रूल 134-ए केवल नाम तक ही सीमित था। उसके बाद व्यवस्था में सुधार करवाया गया। परिवार पहचान पत्र में एकल को दर्ज नहीं किया जाता था। तब इसे दुरुस्त कराने के लिए भी मुद्दा उठाया गया था जो काफी चर्चा में रहा था। 45 साल से ऊपर विधुर की पेंशन नहीं बनाई जाती थी, इसका भी मुद्दा उठाया गया और व्यवस्था में सुधार हुआ। एडवोकेट कैलाश चंद उन बच्चों के लिए फ्री में वकालत करते हैं जिनके मां-बाप गरीब हैं। फ्री में वकालत करके कैलाश चंद ने कई बच्चों को स्कूल से टीसी व अन्य कागज भी दिलाएं है।
समाजसेवी बनकर राजेंद्र सिंह ने की लोगों की मदद
निमोठ निवासी एडवोकेट कामरेड राजेंद्र सिंह प्रमुख रूप से एक समाजसेवी हैं। जो जनता के मुद्दों को हमेशा उठाते रहते हैं। राजेंद्र सिंह ने मेंटल हेल्थ एक्ट के तहत 10 लोगों का केस लड़ा था। यह वह लोग थे जो जिले में मानसिक रूप से परेशान होकर घूम रहे थे और इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था। उसके बाद इनका इलाज करवाया गया। इन मरीजों को जब होश आया तो फिर घर पर रवाना हुए। 2013 में जिले के एक गांव में 7 वर्षीय बच्ची अपने परिवार के साथ हिसार जा रही थी। इस दौरान उसे कोई चोरी करके ले गया। तब राजेंद्र ने करीब डेढ़ महीने तक धरना प्रदर्शन किया। मामले में जब कार्रवाई हुई तो राजस्थान से बच्ची को बरामद किया गया। इस दौरान करीब 20 बच्चियों की जिंदगी को बचाया गया था। एम्स के निर्माण को लेकर करीब साढे 5 साल तक बढ़-चढ़कर मुद्दा उठाया। फिर जाकर सरकार ने भी इसकी सुध ली और एम्स का निर्माण हो रहा है। हरी नगर टी पॉइंट में लगातार हादसे होते थे। 6 मौतें हो चुकी थी। यहां पर भी आंदोलन किया फिर जाकर सड़क सुरक्षा नियमों की पालना की गई। सीहा ओवरब्रिज बनने के कारण किराये में बढ़ोतरी की गई थी। इस पर भी आंदोलन चलाया गया और किराये को सामान्य करवाया गया।
एडवोकेट राजेंद्र सिंह