रेवाड़ी। गांव छुरियावास में रास्ता अवरुद्ध करने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अनिल की अदालत ने आरोपी छुरियावास निवासी सुधीर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि मलबा सुधीर ने ही डलवाया था। पर्याप्त और स्वतंत्र साक्ष्य के अभाव में दोष सिद्ध नहीं हो सका।
यह मामला 29 मार्च 2024 का है। छुरियावास निवासी लाला राम ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके घर तक जाने वाले रास्ते पर मलबा डालकर बंद कर दिया गया है। लाला राम ने अपने भतीजे सुधीर पर रास्ता रोकने का आरोप लगाया था। पुलिस ने जांच के दौरान घटनास्थल का नक्शा बनाया। रास्ते पर पड़े मलबे की तस्वीरें लीं। इसके बाद सुधीर को जांच में शामिल किया गया। पुलिस ने चालान अदालत में पेश किया।
अदालत ने आरोप तय होने के बाद मामले की सुनवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पांच गवाह पेश किए। जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि मौके पर मलबा मिला था। शिकायतकर्ता लाला राम ने भी सुधीर पर रास्ता बंद करने का आरोप लगाया।
शिकायतकर्ता ने स्वीकार किया कि सुधीर उसका भतीजा है। दोनों के बीच संयुक्त संपत्ति को लेकर पहले से दीवानी विवाद लंबित है। यह भी माना कि घटना की कोई वीडियो रिकॉर्डिंग नहीं हुई थी।
पुलिस ने मौके पर मौजूद 30 से 40 ग्रामीणों में किसी स्वतंत्र व्यक्ति को गवाह नहीं बनाया। जांच अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि तस्वीरों पर तारीख, समय या स्थान का उल्लेख नहीं था। उन्होंने यह भी माना कि विवादित संपत्ति के स्वामित्व का सत्यापन नहीं किया गया। इन तथ्यों को बचाव पक्ष ने अपने पक्ष में प्रमुख आधार बनाया।
मामले में 9 जुलाई को अदालत ने निर्णय में कहा कि तस्वीरों से केवल मलबा पड़ा होना साबित होता है। यह प्रमाणित नहीं हो सका कि मलबा सुधीर ने ही डाला था।
अदालत ने कहा कि जब शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच संपत्ति विवाद हो, तब केवल शिकायतकर्ता के बयान पर दोष सिद्धि सुरक्षित नहीं है। कई लोग मौजूद होने के बावजूद स्वतंत्र गवाह शामिल नहीं किए गए।
इससे अभियोजन की कहानी पर संदेह उत्पन्न होता है। इन परिस्थितियों में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा। इसके बाद अदालत ने सुधीर को बरी कर दिया।