रेवाड़ी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जतिन गर्ग की अदालत ने करीब 14 साल पुराने ट्रक लूट और डकैती के मामले में आरोपी अंसार को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपी की संलिप्तता को उचित संदेह से परे साबित नहीं कर सका। मामले में दूसरा आरोपी मुनाफ 18 अप्रैल को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है।
मामला थाना सदर रेवाड़ी में दर्ज वर्ष 2012 की एफआईआर से संबंधित है। 6 मई 2012 को ट्रक चालक नवाब सिंह और क्लीनर सोनू दिल्ली से राजस्थान लौट रहे थे। गांव काकोड़िया के बस स्टैंड के पास एक बोलेरो ने उनके ट्रक को रोक लिया।
बोलेरो से उतरे 3-4 युवकों ने ट्रक में घुसकर दोनों को काबू कर उनके हाथ-पैर बांध दिए और उनके मोबाइल, नकदी व ट्रक लूटकर फरार हो गए। बाद में दोनों को सोहना के पास बोलेरो से उतार दिया गया।
अभियोजन ने मामले में 18 गवाह पेश किए। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण गवाह चालक नवाब सिंह और क्लीनर सोनू ने अदालत में स्पष्ट रूप से कहा कि आरोपी अंसार और मुनाफ उन लोगों में शामिल नहीं थे, जिन्होंने उनका ट्रक लूटा था। दोनों आरोपी की पहचान करने में भी विफल रहे।
अदालत ने यह भी पाया कि अंसार के खुलासा बयान के आधार पर कोई ट्रक या हथियार बरामद नहीं हुआ। लूटा गया ट्रक ग्वालियर के जंगल से लावारिस हालत में मिला था। इसके अलावा आरोपी के कब्जे से हथियार बरामदगी या संबंधित स्वीकृति आदेश भी रिकॉर्ड पर नहीं था।
इन परिस्थितियों में अदालत ने कहा कि आरोपी की पहचान और अपराध में उसकी संलिप्तता साबित नहीं हुई है। अभियोजन संदेह से परे आरोप सिद्ध करने में विफल रहा। इसके चलते अदालत ने अंसार को सभी आरोपों से बरी कर दिया।