कांवड़ लाते वक्त उत्तराखंड के ऋषिकेश जिले में गाड़ी पर पत्थर गिरने से चार जवान युवकों की मौत होने की खबर जैसे ही कोसली में रविवार दोपहर बाद पहुंची तो उनके परिवारों में कोहराम मच गया। हादसे की जानकारी पर आसपास के ग्रामीण और रिश्तेदार भी दुर्घटना में जान गंवाने वालों के घर संवेदना व्यक्त करने के लिए पहुंच गए। पल ही भर में गांवों की गलियों में सन्नाटा था तो मृतकों के घर चीत्कार सुनाईं दे रही थीं। घर आने वाले परिजनों को ढांढ्स बंधा रहे थे। गांव के लोकेश की मौत से उसके पिता रवींद्र के बुढ़ापे का सहारा छिन गया। इकलौता बेटा लोकेश पिता का कार्य में हाथ बंटाता था। वहीं हादसे में जान गंवाने वाले आशीष की पत्नी अर्चना का छह महीने में ही सुहाग उजाड़ गया।
हादसे के बाद गांव में किसी से भी कुछ पूछा जाता है, तो कुछ बताने की बजाए उसकी आंखों से आंसू झलक आते हैं। कोसली बस स्टैंड पर पंक्चर लगाने की दुकान चलाने वाले करीब 32 वर्षीय जितेंद्र का एक बेटा व एक बेटी है। उसे धार्मिक कार्यों में हिस्सा लेने व पूजा पाठ का बहुत लगाव था। वह अपनी दुकान के कार्य को बढ़ाना चाहता था। इसलिए वह कांवड़ के दो जोड़ा लाने की मन्नत मांगी थी। वह दो बार पहले कांवड़ ला चुका था इस बार उसकी तीसरी कांवड़ थी, लेकिन होनी को कुछ ओर ही मंजूर था। जितेंद्र के घर पर हादसे की सूचना नहीं है। ऐसे में उसके बेटा व बेटी पिता के आने का इंतजार कर रहे है।
करीब 22 वर्षीय कमल गांव में ही टैंट की दुकान चलाता है। वह अपनी माता-पिता की इकलौती संतान थी। वह दो बार पहले भी कांवड़ ला चुका है। इस बार उसकी तीसरी कांवड़ थी। टैंट की छोटी दुकान से कार्य शुरू करने वाले कमल शिव भोले का भगत था।
माता-पिता की इकलौती संतान 22 वर्षीय लोकेश शांत स्वभाव था। वह अपने पिता रवींद्र के कार्य में हाथ बंटाने के साथ ही नौकरी की भी तलाश कर रहा था। नौकरी की मन्नत के लिए ही वह गोमुख से कांवड़ लेने के लिए गया था। वह दूसरी बार कांवड़ लाने के लिए गोमुख गया था। खेलों में विशेष रुचि रखने वाला लोकेश अच्छा खिलाड़ी थी।
तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े आशीष का विवाह इसी वर्ष फरवरी माह में हुआ था। हालांकि उससे बड़ी उसकी बहन है, लेकिन भाईयों में बड़ा होने के कारण परिवार की जिम्मेदारी भी उस पर ही थी। कांवड़ लेने के लिए वह दूसरी बार गोमुख गया था। उसके घर में हादसे की सूचना नहीं है, लेकिन छह माह पूर्व विवाह के पहला सावन मना रही आशीष की पत्नी को उसके आने का इंतजार है।
जिसे जहां सूचना मिली, वहीं चढ़ाई कांवड़
कोसली गांव से हरिद्वार व गोमुख के लिए कांवड़ियों की अलग-अलग दस टोलियों में करीब सौ लोग गए हुए है। हादसे के बाद परिजनों ने गांव के सभी कांवड़ियों को हादसे की सूचना दे दी गई। सभी टोलियां कांवड़ लेकर वापस लौट रहे थे, लेकिन जैसे ही जिसे जहां सूचना मिली वहीं आसपास के मंदिरों में कांवड़ को चढ़ा दिया गया।
करीब 17 साल पहले हादसे में गई थी तीन युवकों की जान
ग्रामीणों ने बताया कि करीब 17 साल पूर्व भी गांव में ऐसा भी भीषण हादसा हुआ था, जिसमें तीन नौजवान युवकों की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। गांव से जयपुर के लिए बारात गई थी। जयपुर के समीप युवकों की कार को एक ट्रक ने टक्कर मार दी, जिसमें गांव के तीन युवकों की दर्दनाक मौत हो गई थी।
कोसलिया गौत्र के प्राचीन मठ में रविवार शाम को नहीं हुई आरती
गांव के चार नौजवान युुवकों की हादसे में हुई दर्दनाक मौत के बाद गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। हर आंख नम है। गलिहारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। गांव का प्राचीन कोसलियो गौत्र के मठ में कुछ लोग जरूर बैठे हुए थे, लेकिन वर्षों से होने वाली संध्याकालीन आरती रविवार को नहीं की गई।