रेवाड़ी। शहर के विराट हॉस्पिटल में उपचाराधिन लाभार्थी का कार्ड।
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जिन लाभार्थियों के पास प्रधानमंत्री का पत्र नहीं पहुंच सका है, वह मुख्यमंत्री के पत्र से आयुष्मान योजना का कार्ड बनवा सकता है। केंद्र सरकार की ओर से जिला के 45 हजार परिवारों को लाभार्थी सूची में शामिल किया गया था। इन सभी परिवारों को पीएम पत्र भी भेजने का दावा किया गया था।
पीएम पत्र के माध्यम से लाभार्थी बिना किसी कागजात के सरकारी अस्पताल या सीएसी सेंटर जाकर आयुष्मान कार्ड बनवा सकता था। जिला में पीएम पत्र 20 फीसदी लोगों को ही मिल पाए थे, ऐसे में पीएम पत्र मिलने से वंचित रहे लोगों को परेशानी न हो सीएम पत्र भेजा जाएगा। इन सीएम पत्र को साथ ले जाकर लाभार्थी अपना आयुष्मान कार्ड बनवा सकते हैं। आईटी मैनेजर मनीष खत्री का कहना है कि अगले सप्ताह तक जिला में ये सीएम पत्र मिलने शुरू हो जाएंगे। अंबाला से इसकी शुरूआत हो चुकी है।
शीला का सहारा बना आयुष्मान
शहर निवासी शीला के पति की मौत के बाद वह किसी तरह से अपने परिवार की का लालन-पालन कर रही थी। लेकिन पेट में तकलीफ होने के चलते उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। चिकित्सकों से जांच कराई तो ऑपरेशन एक मात्र विकल्प बताया। उपचार पर खर्च करीब 50 हजार था, ऐसे में शीला के लिए उपचार कराना मुसीबत बन गया। आयुष्मान कार्ड के बारे में जानकारी मिली तो उसने नागरिक अस्पताल जाकर अपने नाम का पता किया। नाम सूची में था और कार्ड बन गया। तीन दिन पहले ही शीला का शहर के विराट अस्पताल में आयुष्मान योजना के तहत ऑपरेशन हुआ है। शीला का कहना है कि यहां पर उसने एक रुपया भी खर्च नहीं किया है। ऐसी ही काहनी विराट अस्पताल में उपचार करवा रही चंद्रो व सुनीता की है। दोनों का कहना है कि आयुष्मान कार्ड के तहत स्वास्थ्य बीमा गरीबों के लिए वरदान से कम नहीं है। बिना कार्ड के उपचार कराने में अनेक मुसीबतों का सामना करना पड़ता।
सूची में नाम वालों का ही बनेगा आयुष्मान कार्ड
अमर उजाला की ओर से चलाए जा रहे अभियान के दौरान हर रोज करीब 100 लोगों की ओर से फोन कर बीपीएल कार्ड होने के बावजूद भी कार्ड नहीं बनने की शिकायत की जा रही है। ये लोग डीसी, सीएम विंडो व आयुष्मान के जिला नोडल अधिकारी के पास भी शिकायत कर चुके हैं। ऐसे लोगों को जानकारी देने के लिए नोडल अधिकारी से बात की गई। नोडल अधिकारी डॉ. टीसी तंवर का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से 45 हजार लोगों की जो सूची भेजी गई थी, उनमें नाम होने पर ही आयुष्मान कार्ड बन सकता है। सामाजिक-आर्थिक जनगणना-2011 के आंकड़ों के हिसाब से ही सूची तैयार की गई है। इस सूची में जिनके नाम नहीं हैं, उनके कार्ड नहीं बन सकते। चाहे वो लोग बीपीएल श्रेणी में ही क्यों न हो। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि सरकार इस तरह के वंचित लोगों को योजना से जोड़ने के लिए काम कर रही है, उम्मीद है जल्द ही कोई समाधान निकलेगा।