रेवाड़ी। जिला उपभोक्ता आयोग ने एक मामले में निर्णय सुनाते हुए बीमा कंपनी पर एक लाख का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना टाटा एआईजी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी पर लगाया गया है। इतना ही नहीं आयोग ने स्पष्ट किया है कि कंपनी ने अनावश्यक रूप से 11 दस्तावेज ग्राहक से मांगे, ताकि क्लेम दिया जा सके। जबकि ज्यादा दस्तावेजों की आवश्यकता ही नहीं थी।
कंपनी की ओर से इस मामले में अपने निरीक्षक द्वारा भी जांच कराई गई थी, लेकिन बीमा कंपनी ने यह कहकर क्लेम निरस्त कर दिया था कि मृत्यु का कारण सीढ़ियों से गिरकर चोट लगना नहीं है, बल्कि टीबी जैसी बीमारी से मौत हुई है। इसके साथ ही उपभोक्ता आयोग ने 15 लाख रुपये बीमा राशि 9 प्रतिशत ब्याज सहित शिकायतकर्ता को अदा करने और एक लाख रुपये मुआवजा भी ब्याज सहित अदा करने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त वाद खर्चे में होने वाला 11 हजार खर्च भी बीमा कंपनी को देना होगा।
बावल कस्बा के मोहल्ला होली छोटा निवासी विष्णु भगवान की पत्नी का निधन 14 अगस्त 2022 को हो गया था। महिला की मौत सीढ़ियों से गिरकर चोट लगने के कारण हुआ था। विष्णु भगवान ने स्वयं एवं पत्नी के लिए टाटा एआईजी इंश्योरेंस कंपनी से एक्सीडेंट कार्ड प्लस इंश्योरेंस पॉलिसी ली हुई थी। इसमें एक्सीडेंट पर मृत्यु होने की स्थिति में स्वयं का 30 लाख रुपये का व पत्नी का 15 लाख रुपये का बीमा किया हुआ था। इसके लिए उन्होंने बीमा कंपनी को 8221 इंश्योरेंस प्रीमियम राशि भी अदा की थी। पत्नी की मृत्यु होने के पश्चात जब बीमा कंपनी से क्लेम राशि मांगी गई, तो कंपनी ने शिकायतकर्ता से 11 दस्तावेजों सहित रिपोर्ट देने के लिए लिखित में निर्देश दिए।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने कई उच्च अधिकारियों को लगातार शिकायत की। जांच कर इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। इंश्योरेंस कंपनी ने अपनी तरफ से जांच भी कराई और उसमें स्पष्ट किया कि विष्णु भगवान की पत्नी की मौत सीढ़ियों से गिरकर चोट लगने के कारण नहीं, बल्कि टीबी वह अन्य बीमारी के कारण हुई है। इस कारण क्लेम नहीं दिया जा सकता। इसके पश्चात शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग में 30 जनवरी 2023 को शिकायत पत्र दाखिल कर इंश्योरेंस कंपनी से मुआवजा दिलाए जाने की मांग की थी।
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कंपनी ने शिकायतकर्ता से किया धोखा : आयोग
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष संजय कुमार खंडूजा और सदस्य राजेंद्र प्रसाद ने निर्णय में स्पष्ट किया कि इंश्योरेंस कंपनी द्वारा अनावश्यक रूप से कई दस्तावेज मांगे गए थे, जबकि इनकी बहुत आवश्यकता नहीं थी। इसके अलावा उपभोक्ता आयोग के समक्ष पीजीआइएमएस रोहतक में उपचार संबंधित सभी रिकार्ड पेश किए गए। इसमें मृत्यु का कारण चोट लगना पाया गया था। इसके साथ ही कई दस्तावेजों ने यह साबित किया कि शिकायतकर्ता की पत्नी की मृत्यु सीढ़ियों से गिरकर चोट लगने के कारण हुई थी। इस पर जिला उपभोक्ता आयोग ने कहा कि इंश्योरेंस कंपनी ने शिकायतकर्ता के साथ धोखा किया है।