सड़कों पर खड़े हैं मौत के खंभे, विभाग बेखबर
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। सड़क हादसों में कमी लाने के लिए जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग अपनी इस जिम्मेदारी को किस ढंग से निभा रहे हैं इसके लिए जिले के किसी भी गांव की सड़क को देखा जा सकता है। बैठक में सड़कों की बाधाओं को दूर करने के लिए त्वरित कार्रवाई करने का भरोसा दिलाने वाले अधिकारी कितनी गंभीरता से कार्य करते हैं, इसकी हकीकत बिल्कुल उलट है। जिले में अब जितनी भी नई सड़कों का निर्माण किया जा रहा है उनकी बाधाएं तक नहीं हटाई जा रही है जिसकी वजह से हादसों का डर बना हुआ है।
नियमानुसार सड़क का निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पूर्व उसकी बाधाओं को दूर किया जाना बेहद जरूरी है लेकिन जो गांवों की नई सड़कों का कार्य हो रहा है उसमें इसके ठीक उलट किया जा रहा है। हालात यह है छोटी-मोटी बाधाएं तो दूर की बात सड़कों की हद में आने वाले बिजली के पोल और अन्य निर्माण कार्य तक नहीं हटाया जा रहा है। बावल उपमंडल के गांव में आसलावास से बिशनपुर होकर अलावलपुर तक नई सड़क का निर्माण किया गया है। लगभग चार माह पहले इस सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। इस सड़क के बीचोंबीच चार पोल खड़े हैं। पोल ही नहीं अपितु एक स्थान पर एक मकान का हिस्सा तक आ रहा है बावजूद इसके लोक निर्माण विभाग ने सड़क का कार्य पूरा मान लिया है। सड़क के बीचोंबीच खड़े एक पोल तथा तीन के सड़क क्षेत्र में होने के कारण हमेशा हादसे का डर बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में हमने कई बार अधिकारियों को भी अवगत कराया लेकिन समाधान नहीं हुआ है।
सीएम विंडो तक शिकायत फिर भी नहीं हटे पोल
हरियाणा कृषि विपणन बोर्ड द्वारा गढ़ी बोलनी रोड से छूरियावास तक आठ माह पहले सड़क बनाई गई थी। इस सड़क के एक लेन में बिजली निगम के चार पोल आ रहे हैं जिनको हटाने को लेकर स्थानीय नागरिक सीएम विंडो तक में शिकायत में दे चुके हैं लेकिन आज तक खंभे नहीं हटाए गए हैं।
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अलावलपुर तक बनी सड़क के बीचोंबीच खंभे खड़े होने की जानकारी मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो बिल्कुल नहीं होना चाहिए। सोमवार को मैं स्वयं मुआयना करूंगा तथा सड़क के बीच में आ रहे खंभों को हटवा दिया जाएगा। - हेमंत कुमार, कार्यकारी अभियंता, पीडब्ल्यूडी
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इस मामले में जो हाल मैने बिजली निगम के अधिकारियों का देखा है, मैं स्वयं स्तब्ध हूं। बिजली के जो खंभे लगाए हैं वह रास्ते के बीचोंबीच है। विपणन बोर्ड की हद में है। हमने इन्हें हटाने के लिए न केवल निगम अधिकारियों को पत्र भेजे हैं अपितु मैं व्यक्तिगत तौर पर भी अधिकारियों से मिला हूं लेकिन इन चार खंभों के हटाने के लिए ही दो लाख रुपये से अधिक इस्टीमेट दिया गया है जो कि अदा कर पाना संभव नहीं है। कम से कम सरकार को इस मामले में दिशा-निर्देश जारी करने चाहिए कि ताकि लोगों की जिंदगी दांव पर नहीं लगे। - रामनिवास यादव, कार्यकारी अभियंता, कृषि विपणन बोर्ड।