रेवाड़ी। आयुष औषधालय के लिए कम से कम 512 स्क्वायर फीट जगह अनिवार्य है। ग्राम पंचायतों को जमीन उपलब्ध करानी होगी ताकि औषधालय में ओपीडी, दवा वितरण केंद्र और चिकित्सा अधिकारी के बैठने की समुचित व्यवस्था हो सके।
सरकार ने जिले के 5 गांवों लिसान, करावरा मानकपुर, रोहड़ाई, जयसिंहपुरा और झाबुआ में नए आयुष औषधालय खोलने की स्वीकृति प्रदान की है। प्रत्येक औषधालय के निर्माण और सेटअप पर लगभग 60 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे।
इससे कुल 3 करोड़ रुपये का निवेश स्वास्थ्य ढांचे पर होगा। राज्य के 5 जिलों में 26 आयुष औषधालय खुलने हैं जिनको मंजूरी मिली हैं।
इन गांवों की तरफ से प्रस्ताव पास कर निदेशालय मिली है। अभी इन गांवों के आसपास कोई आयुष डिस्पेंसरी नहीं है। इन नए केंद्रों केंद्रों के खुलने से न केवल संबंधित गांवों बल्कि उनके आसपास की दर्जनों ढाणियों और छोटे गांवों के हजारों लोगों को लाभ मिलेगा।
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जिले में हैं 18 आयुष औषधालय
जिले में वर्तमान में 18 आयुष औषधालय संचालित हैं। इनमें राहत की बात यह है कि सभी केंद्रों पर चिकित्सकों के पद भरे हैं लेकिन सबसे बड़ी समस्या फार्मासिस्ट को लेकर है। वर्तमान में चल रहे 18 केंद्रों में से सिर्फ 9 में फार्मासिस्ट तैनात हैं, जबकि शेष केंद्रों पर काम प्रभावित हो रहा है। नए केंद्रों के खुलने के बाद स्टाफ प्रबंधन बड़ी जिम्मेदारी होगी।
सस्ती और सुलभ चिकित्सा मिलेगी
आयुष औषधालयों में आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी पद्धति से ग्रामीणों को असाध्य रोगों का उपचार बिना किसी दुष्प्रभाव के मिल सकेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों को जोड़ों के दर्द, गैस और अन्य पुरानी बीमारियों के लिए शहर नहीं भागना पड़ेगा। इन औषधालयों को धीरे-धीरे हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां योग प्रशिक्षकों के माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली सिखाई जाएगी।
वर्जन
जो दिशा निर्देश मिलेंगे उसके अनुसार कार्य किए जाएंगे। इन गांवों की तरफ से काफी समय पहले प्रस्ताव भेजे गए थे। अब इनमें आयुष केंद्र खुलेंगे तो ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी।-डॉ. वसंत सोनी, जिला आयुष अधिकारी।