संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। नगर परिषद की ओर से शहर की सफाई पर प्रतिमाह 50 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके बाद भी शहर स्वच्छता रैंकिंग में बुरी तरह से पिछड़ गया है। पिछले सात वर्षों में शहर की सबसे खराब रैंकिंग 2024 में आई। स्वच्छता रैंकिंग में शहर के पिछड़ने के कई कारण हैं। संसाधनों, प्रबंधन और जागरूकता की कमी सफाई व्यवस्था में बाधक बन रही है।
स्वच्छता रैंकिंग में शहर पिछड़ने के बाद भी किसी प्रकार की समीक्षा बैठक नहीं की गई। स्वच्छता रैंकिंग के गिरने के कारणों का पता लगाया जाना चाहिए ताकि नगर परिषद के अधिकारी सुधार कर सकेें। पिछले वर्ष भी समीक्षा नहीं की गई थी।
सफाई व्यवस्था की समीक्षा कर कमियों को दूर किया गया होता शहर स्वच्छता रैंकिंग में नहीं पिछड़ता। रैंकिंग में शहर की खराब दशा पर सवाल यह उठने लगा है कि हर माह लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी दशा क्यों नहीं सुधर रही है।
जारी की गई स्वच्छता रैंकिंग में राष्ट्रीय स्तर पर 232 अंक और राज्य स्तर पर 46 अंक से रेवाड़ी पिछड़ा है। इस बार राष्ट्रीय स्तर पर 490 और राज्य स्तर पर 57वां स्थान मिला है।
शहर की सफाई व्यवस्था पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नियमित सफाई नहीं होने से जगह-जगह सड़कों के किनारे कूड़े के ढेर लगा रहता है। सफाई के प्रति जागरूक करने के लिए नगर परिषद की ओर से लोगों को जागरूक करने की दिशा में भी कुछ खास नहीं किया गया।
नगर परिषद की ओर से सफाई व्यवस्था को लेकर कुछ दिनों के लिए एक कार्यक्रम जरूर चलाया गया था, लेकिन उससे कोई खास सफलता नहीं मिली। अभी तक नगर परिषद ने सफाई को लेकर बड़े स्तर पर अभियान नहीं चलाया है। संवाद
सीएम फ्लाइंग की जांच में मिली थीं सफाई व्यवस्था में खामियां
इस वर्ष जनवरी में सीएम फ्लाइंग की जांच में शहर की सफाई व्यवस्था की पोल खुली थी। फ्लाइंग की टीम ने सफाई व्यवस्था को लेकर जांच की थी तो कई खामियां सामने आई थीं। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता टीम ने सुबह 7 बजे से लेकर 9 बजे तक सफाई व्यवस्था का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान शहर में कई जगह कूड़े के ढेर पाए गए थे। वहां कोई भी सफाई कर्मी व वाहन कूडा उठाते हुए नहीं पाया गया था। निरीक्षण के दौरान पाया गया था कि शहर में स्थित कूडा कलेक्शन प्वाइंट की सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है।
इन बातों पर नहीं दिया जा रहा जोर
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन ठीक से नहीं होने, लोगों में जागरूकता की कमी, शहर में डस्टबिन नहीं लगाया जाना, गीला और सूखा कचरा को अलग ना करना, डंपिंग साइट को खत्म नहीं किए जाने से शहर की सफाई व्यवस्था लचर है। टॉयलेट की दशा खराब है। नालों की ठीक प्रकार से सफाई नहीं कराई जाती है जिससे गंदगी और जलभराव की समस्या पैदा होती है। स्वच्छता रैंकिंग गिरने के ये मुख्य कारण हैं। इसके बाद भी इन बातों पर जोर नहीं दिया जा रहा है।
सफाई कर्मचारियों के कमी से भी पैदा हो रही समस्या
शहर में तीन लाख की आबादी पर 320 से अधिक सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं। आबादी को देखते हुए यह संख्या काफी कम है। करीब 170 सफाई कर्मचारियों की और जरूरत है। शहर में कुल 31 वार्ड हैं। कर्मचारियों की कमी से नियमित सफाई नहीं होती जिससे अधिकतर वार्डाें में जगह-जगह पर कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। कुछ वार्ड ऐसे भी हैं जिनमें सफाई व्यवस्था दम तोड़ चुकी है। सफाईकर्मियों की कमी कूड़े के उठान में बाधक बनी हुई है। शहर में रोजाना 110 टन कूड़ा निकलता है। शहर के 90 फीसदी लोग अब भी अपने घरों से निकलने वाले गीले और सूखे कूड़े को अलग नहीं कर रहे हैं। नगर परिषद की ओर से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का टेंडर एक साल से नहीं किया है। कूड़ा उठाने वाली कंपनी के पास पर्याप्त संसाधन भी नहीं हैं।
वर्जन
जल्द ही बैठक कर स्वच्छता रैंकिंग गिरने के कारणों पर चर्चा की जाएगी। स्वच्छता रैंकिंग में गिरावट के कारणों का पता किया जाएगा। इसके बाद खामियों को दूर कर बेहतर सफाई व्यवस्था बनाई जाएगी।-पूनम यादव, चेयरपर्सन, नगर परिषद रेवाड़ी।