फिलहाल त्योहारी सीजन चल रहा है। मिठाइयों के खास त्योहार दीपावली में महज कुछ ही दिन बचे हैं। ज्यादा मांग के चलते इस समय मिलावट खोरों का धंधा भी चरम पर होता है लेकिन राज्य सरकार अपने सूबे की जनता के स्वास्थ्य के प्रति कितनी संजीदा है, इस बात का पता ऐसे लगाया जा सकता है कि महज एक एफएसओ के हवाले 44 लाख से ज्यादा लोगों का स्वास्थ्य है।
मूल रूप से रेवाड़ी में पोस्टेड खाद्य सुरक्षा अधिकारी एनडी शर्मा को जिले के अलावा पिछले काफी समय से गुड़गांव, मेवात और महेंद्रगढ़ में फूड सेफ्टी ऑफिसर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
ऐसे में इन चार जिलों के 44 लाख लोगों द्वारा बाजार से खरीदी जा रही खाद्य सामग्री की शुद्धता की क्या गारंटी है, यह सवाल उठता है। यहां बता दें कि कई देश ऐसे हैं, जिनकी पूरी आबादी 44 लाख नहीं है और वहां खाद्य सुरक्षा के लिए पूरा सिस्टम होता है।
एक साल में 107 सैंपल 11 फैल, कार्रवाई जीरो
सरकार की ओर से बाजारों में बिकने वाली खाने की वस्तुओं के शुद्धता मानकों को निर्धारित किया हुआ है। लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए सरकार की ओर शहर में बिकने वाली इस तरह की वस्तुओं की मोनीटरिंग के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारी नियुक्त किया जाता है।
जिसका काम खाने-पीने की वस्तुओं के नमूने लेकर उनकी शुद्धता की जांच करना होता है, यदि मानक तयशुदा से कम है तो कार्रवाई का प्रावधान है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से जनवरी 2015 से लेकर 27 अक्तूबर तक 107 सैंपल लिए गए, जिनमें से 11 सैंपल ऐसे थे जो सब स्टैंर्ड या फिर मिस ब्रांड पाए गए। कानून इन सैंपलों पर अब तक कार्रवाई होनी थी, लेकिन खाद्य सुरक्षा अधिकारी की व्यस्तता के चलते कोई भी सैंपल कार्रवाई अधिकारी तक पहुंच तक नहीं पाया है।
अक्तूबर में लिए मात्र सात सैंपल
रेवाड़ी जिले में अक्टूबर त्योहारी सीजन होने के बावजूद मांत्र छह सैंपल लिए गए हैं। सितंबर में इनकी संख्या 15 थी लेकिन अगस्त में मात्र 4 सैंपल ही लिए जा सके। खास बात यह है कि अक्टूबर में लिए सैंपलों की रिपोर्ट अभी तक नहीं मिली है और जब तक रिपोर्ट आएगी तब तक सबकुछ बिक चुका होगा।
करनाल में होती है जांच, 20 दिन तक आती है रिपोर्ट
दावा है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी शिकायत या फिर समय-समय शहर में खाने-पीने की वस्तुओं की गुणवत्ता परखने के लिए सैंपल लेते रहता है। सैंपल लेने के बाद उसे मुख्य चिकित्सा अधिकारी की अप्रूवल के बाद हरियाणा में मात्र एक प्रयोगशाला करनाल में जांच के लिए भेज दिया जाता है।
20 दिन के बाद रिपोर्ट विभाग को वापस मिल जाती है। यदि कोई पार्टी करनाल रिपोर्ट से सहमत नहीं होती तो उसे रीचेकिंग के लिए गाजियाबाद या फिर मैसूर भेज दिया जाता है। जिसकी रिपोर्ट 6 महीने में मिलती है। रिपोर्ट को तीन कैटेगरी में बांटा जाता है। पास, सब स्टैंर्ड या मिस ब्रांड और अनसेफ।
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पांच साल में केवल चार अनसेफ केस
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से पिछले पांच सालों में हुई कार्रवाई के आंकड़ों के अनुसार धारूहेड़ा से एक ही फर्म के दो केस व रेवाड़ी से दो केस आए हैं। सभी केस गुटखा उत्पादों के थे और सीजीएम कोर्ट में चल रहे हैं। यदि उत्पाद अनसेफ कैटगरी में आता है तो उसे सीजेएम कोर्ट में भेेज दिया जाता है। इसमें 6 महीने से लेकर तीन साल की सजा का प्रावधान है।
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अस्सी फीसदी लोगों के पास नहीं हैं, लाइसेंस
रेहड़ी हो या फिर रेस्टोरेंट सभी ऐसे लोग जो खाने पीने की वस्तुओं को बेचने या फिर बनाने के कामों में लगे हुए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से लाइसेंस लेना अनिवार्य है, लेकिन आंकडों को देंखे तो अस्सी फीसदी ऐसे लोगों के पास लाइसेंस तक नहीं है। जबकि 12 लाख तक इस व्यवसाय में लगे लोग मात्र 100 रुपये की फीस देकर सालाना लाइसेंस पा सकते हैं।
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5 लाख तक का जुर्माना, लगा महज 15 हजार
सेंपलिंग की रिपोर्ट आने के बाद यदि उत्पाद सब स्टैंर्ड या मिस ब्रांड पाया जाता है, तो उस पर कार्रवाई करने का अधिकार एडीसी को दिया गया है। एडीसी सब स्टैंर्ड या मिस ब्रांड के लिए अधिकतम 5 लाख तक का जुर्माना लगा सकता है, इसमें सजा का कोई प्रावधान नहीं है। खास बात यह है कि जिले में अब तक सबसे ज्यादा जुर्माना महज 15 हजार रुपये तक का ही लगा है। शायद इसीलिए त्योहारों का सीजन खासकर दीवाली के आसपास जमकर मिलावट का खेल खेला जाता है। क्योंकि कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति ही की जाती है।
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107 देशों की जनसंख्या है 44 लाख से कम
फूड सेफ्टी ऑफीसर के तौर पर चार जिलों में कुल 44 लाख से ज्यादा की जनसंख्या है। यह जनसंख्या दुनिया भर के 233 देशों में से 107 देशों से ज्यादा है। यानी 107 देश हैं, जिनमें किसी में भी 44 लाख से ज्यादा लोग नहीं रहते। जिन 107 देशों की जनसंख्या 44 लाख से कम है उनमें वेटिकन सिटी, लाइबेरिया, जमैका, फिजी, भूटान, लैग्जमबर्ग, ग्रीनलैंड आदि देश शामिल हैं।
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रेवाड़ी में केवल एक क्लर्क है, वहीं चार जिलों में केवल एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति से काम पर प्रभाव तो पड़ता है। शहर में अधिकतर खाने-पीने की चीजों बनाने व बेचने वालों ने लाईसेंस तक नहीं लिया हुआ, इसलिए मॉनीटिरिंग करना भी मुश्किल होता है।
- मनफूल सिंह, क्लर्क, खाद्य सुरक्षा विभाग
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दिवाली का त्यौहार देखते हुए डिप्टी सिविल सर्जन के साथ मिलकर टीम गठित की गई है। लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ न हो इसके लिए छापामारी की जा रही है। सरकार की ओर से मिले आदेशों की यथासंभव कर रहे हैं।
- एनडी शर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
नई नियुक्तियां सरकार के हाथ में है। जिले में मिलावटखोरों पर अंकुश के लिए स्वास्थ्य विभाग की एक टीम तत्काल तैयार करवाई जाएगी। - डॉ. यश गर्ग, डीसी