संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। अक्तूबर 2024 में विधानसभा चुनाव के बाद से जिले में हैप्पी कार्ड योजना ठप पड़ी है। तब से अब तक पंचकूला हेडक्वार्टर से एक भी कार्ड बनकर नहीं आया है। जिले के करीब 33 हजार कार्ड अब भी पंचकूला में अटके हैं। इनकी न छपाई हो रही है, न ही डिपो को भेजा जा रहा है। इससे हजारों लाभार्थी योजना से वंचित हो रहे हैं।
चुनाव से पहले रोडवेज विभाग ने कार्ड भेजे थे। इसके बाद योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। रेवाड़ी में 90 हजार लोगों ने योजना के लिए आवेदन किया था। इनमें से 57 हजार कार्ड चुनाव से पहले छपकर आए जिसमें 51 हजार कार्ड वितरित किए गए हैं। बाकी 6 हजार कार्ड बस अड्डे में रखे हैं, जिनका वितरण चल रहा है।
रोडवेज यूनियन के एक पदाधिकारी ने बताया कि प्रदेशभर के करीब 8 से 9 लाख लोगों ने चुनाव बाद हैप्पी कार्ड के लिए आवेदन किया है, लेकिन अभी तक कार्ड वितरण तो दूर उनके कार्ड भी नहीं बने हैं। ये परिवार आए दिन कार्ड की उम्मीद में बस अड्डे में आते हैं, जिन्हें कर्मचारी लौटा देते हैं।
उन्होंने बताया कि चिंताजनक बात तो यह है कि जिनके पास कार्ड है, उनको भी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है क्योंकि डिपो की करीब 70 ई-टिकटिंग मशीनें खराब हालत में हैं, जिन्हें ठीक होने के लिए हेडक्वार्टर पंचकूला भेजा हुआ है। पिछले करीब 6 माह से अधिकतर मशीनें ठीक होकर ही नहीं आई हैं जिसके चलते यात्रियों को खासी परेशानी हो रही है।
पिछली साल आवेदन किया, अब तक बनकर नहीं आया कार्ड
शहर निवासी अंकित ने बताया कि हैप्पी कार्ड के लिए अगस्त 2024 में आवेदन किया था, लेकिन आज तक मेरा कार्ड नहीं पहुंचा है। कार्ड के लिए में कई बार बस स्टैंड पर जाकर पूछताछ कर चुके हैं लेकिन हर बार एक ही जवाब मिलता है कि अभी कार्ड बनकर नहीं आया है।
बावल के ईश्वर सिंह ने बताया कि मैंने भी आवेदन किया था, कई महीने पहले ही कार्ड आ जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक नहीं आया है, कई बार पता कर चुके हैं। कुछ आवेदकों ने बताया कि उन्होंने नवंबर के आसपास आवेदन किया, मगर अभी तक कार्ड आने का मैसेज नहीं आया, जबकि कुछ का आ चुका है। हालांकि, रजिस्ट्रेशन का सभी का आ चुका है।
वर्जन
हैप्पी कार्ड हेडक्वार्टर का मामला है। हम सिर्फ वितरक हैं। हेडक्वार्टर से जो भी कार्ड भेजे जाते हैं, उन्हें वितरित करना हमारी जिम्मेदारी है। अगर कार्ड आएंगे तो हम इनको भी वितरित कर देंगे।- प्रदीप अहलावत, जीएम, रोडवेज रेवाड़ी।