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आसमान में छाए बादल व बूंदाबांदी से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें--

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रेवाड़ी। दिनभर आसमान में छाए बादलों और सुबह हल्की बूंदाबांदी से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें बन गई हैं। सरसों की फसल को बारिश के साथ चल रही तेज हवाओं से नुकसान पहुंच रहा है। गेहूं की फसल को इस बारिश से नुकसान भी है, तो कहीं फायदा भी हो रहा है। बुधवार को भी शाम तक सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुई। पूरे दिन आसमान में बादल छाए रहे और रुक रुककर बूंदाबांदी होती रही। इसके अलावा ठंड लौटकर आ रही है। बुधवार को अधिकतम तापमान में 5 डिग्री की गिरावट हुई। तापमान 24.5 डिग्री से गिरकर 19 डिग्री पर आ गया है। न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के साप्ताहिक पूर्वानुमान के अनुसार इलाके में अगले 36 घंटों में हल्की और मध्यम बारिश और कोहरा पड़ने की आशंका जताई गई थी।
बुधवार तड़के करीब चार बजे से मौसम ने अचानक करवट ली और तेज हवाओं के साथ हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई। कभी तेज तो कभी हल्की बूंदाबांदी का सिलसिला दिन में करीब डेढ़ बजे तक जारी रहा। यह बारिश किसानों के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है। इससे सरसों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
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जिले में इस बार सरसों की अच्छी पैदावार होने की संभावना है। गत वर्ष भी बारिश के कारण सरसों की फसल में नुकसान हुआ था। किसान इस बात से चिंतित हैं कि इस बार भी बारिश उनकी मेहनत पर पानी न फेर दे।
जिले में इस बार सरसों की बिजाई करीब 67 हजार हेक्टेयर में हुआ है। करीब 20 मण सरसों प्रति एकड़ पैदावार होने का अनुमान है।
सरसों की फसल पकने को तैयार खड़ी है। लेकिन अचानक मौसम ने उनके काम में अड़ंगा डाल दिया। बारिश के कारण सरसों का दाना काला पड़ने की संभावना बन गई है। किसानों को चिंता इस बात की भी है कि बरसात कुछ दिन और जारी रही तो सरसों की फली में दाना सड़ भी सकता है।
मौसम का उतार-चढ़ाव लोगों को बीमार कर रहा है। बूंदाबांदी जहां ठंड बढ़ा रही है वहीं ओलावृष्टि का डर किसानों को सता रहा है। लेकिन ठंड लोगों को परेशान कर रही है। दो दिन पहले तक दोपहर के समय जबरदस्त धूप भी खिल रही थी, लेकिन अब धूप भी गायब हो चुकी है। शाम तक सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। मौसम बदला तो तापमान भी लुढ़क गया।
इस समय हो रही बूंदाबांदी और बारिश सरसों की फसल के लिए बहुत नुकसान दायक है। हालांकि गेहूं की फसल के लिए डर नहीं है। - प्रदीप, किसान
सरसों की फसल अब पकने को तैयार है। मार्च के पहले सप्ताह में सरसों की फसल की कटाई शुरू हो जाती थी, लेकिन बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। - मनोज, किसान
सरसों की फसल पकने को है, लेकिन ईश्वर की माया को कौन जाने। रोजाना होने वाली बारिश और बादलों की गड़गड़ाहट से किसानों की धड़कन बढ़ने लगी हैं। - अशोक, किसान
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अभी किसानों को डरने की जरूरत नहीं है। अगर लगातार इसी तरह का मौसम रहता है तो नुकसान की संभावना है। गेहूं की फसल में अभी किसान सिंचाई न करें। - डॉ. जोगिंद्र यादव, कृषि वैज्ञानिक, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल
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