एक्सटेंशन ब्लॉक :नए अस्पताल में चरमराई हैं व्यवस्थाएं
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। नागरिक अस्पताल के एक्सटेंशन ब्लॉक को शुरू हुए चार दिन हो गए हैं, लेकिन वहां की कमियां अभी दूर नहीं हुई है। स्टाफ सदस्यों के साथ-साथ यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी दिक्कत हो रही है। बेशक अस्पताल पूरा एयरकंडीशंड है, लेकिन एसी को सुबह साढ़े नौ बजे के बाद ही चलाया जाता है, इससे लैब के कर्मचारियों का काम प्रभावित होता है, जिसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है। लिफ्ट चलाने के लिए अभी तक कर्मचारी की नियुक्ति नहीं हुई है। मरीजों को खुद ही लिफ्ट ऑपरेटर करनी पड़ रही है जिन बुजुर्गों और मरीजों को लिफ्ट नहीं चलानी आती है उनको सीढ़ियां चढ़कर ओपीडी और वार्ड में जाना पड़ रहा है। अस्पताल हॉट लाइन से जुड़ा होने के बावजूद कर्मचारी और मरीजों को बिजली गुल की समस्या से दो चार होना पड़ रहा है।
नागरिक अस्पताल का एक्सटेंशन ब्लॉक का उद्घाटन तकनीकी कमियों व इन्फ्रास्ट्रक्चर ठीक नहीं होने की वजह से देरी से हुआ। विधायक रणधीर सिंह कापड़ीवास ने चार दिन पूर्व हवन कर इसकी ओपीडी शुरू करवा दी थी। निश्चित रूप से नए भवन में चिकित्सकों के बैठने से यहां मरीजों की भीड़ भी होने लगी है। अस्पताल में बेशक नेत्र, त्वचा, ईएनटी के अलावा एमडी व एमएस अपनी सेवा दे रहे हैं, लेकिन अभी यहां बहुत सी ऐसी कमियां हैं, जो मरीजों के साथ-साथ स्टाफ सदस्यों के लिए भी परेशानी बनी हुई है। अस्पताल हॉट लाइन से जुड़ा है, लेकिन लाइट कब चली जाए, कोई नहीं जानता। लाइट गुल होने से चिकित्सक भी परेशान रहते हैं। लिफ्ट चलाने वाला कोई नहीं होने के कारण कई बार यह ओवरलोड भी हो जाती है। नए भवन में एक्सरे व अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं की गई है। चिकित्सकों द्वारा एडवाइस करने के बाद मरीजों को उपरोक्त के लिए पुराने भवन में जाना पड़ता है। पर्ची बनवाने व दवाई लेने के लिए भी मरीजों को पुराने नागरिक अस्पताल की ओर रुख करना पड़ता है। अस्पताल में अपनी बारी का इंतजार करने वाले मरीजों के बैठने के लिए कुछ हिस्से में ही कुर्सियां लगाई गई है। लेबोरेट्री में आने वाले मरीजों के अलावा नेत्र रोग विशेषज्ञ से जांच कराने वाले मरीजों के लिए बैठने की व्यवस्था के नाम पर औपचारिकता ही पूरी की गई है। ज्यादातर मरीज जमीन पर ही बैठकर इंतजार करते हैं।
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इतनी बड़ी बिल्डिंग बना दी गई है, लेकिन पर्ची बनवाने के लिए नागरिक अस्पताल ही जाना पड़ता है। नागरिक अस्पताल में पर्ची बनवाने वालों की भीड़ लगी रहती है। यदि नए भवन में भी पर्ची बनाने वालों की व्यवस्था कर दी जाए तो मरीजों की परेशानी कम हो सकती है। - अंजू देवी ।
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चार मंजिला भवन है, इसलिए इसमें लिफ्ट लगाकर अच्छा काम किया गया है, लेकिन लिफ्ट चलाने वाला कोई नहीं होने के कारण लोगों को इसमें जाने में डर लगता है। वह स्वयं लिफ्ट से नहीं आकर सीढ़ियां चढ़कर आए हैं। अस्पताल प्रशासन को मरीजों की समस्या देखते हुए जल्द से जल्द लिफ्ट चलाने वाला नियुक्त करना चाहिए। - राजेंद्र सिंह।
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मैं बुड़ौली से आंख दिखाने के लिए आया हूं।। भीड़ ज्यादा है। बैठने तक की जगह तक नहीं है, इसलिए जमीन पर ही बैठना पड़ा है। डॉक्टर के गेट पर कोई कर्मचारी नहीं है, जिससे मरीज मनमानी कर रहे हैं। धक्का शाही चल रही है। वह बुजुर्ग है, कमजोर है, इसलिए धक्का मुक्की नहीं करके अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं। - इंद्रजीत सिंह।
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अस्पताल में एसी के लिए सारी व्यवस्था तो की गई है, लेकिन पोर्च का एसी कम ही चलता है। वह सुबह नौ बजे अस्पताल में आया था, लेकिन एसी बंद था। करीब साढ़े नौ बजे एसी चालू किया गया। बीचबीच में लाइट चली जाने पर एसी भी बंद हो जाता है। - राजू सिंह।
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अभी अस्पताल की बिल्डिंग को टेक ओवर नहीं किया गया है। अस्पताल में रही कमियों से लोक निर्माण विभाग को अवगत करा दिया गया है। लिफ्ट चलाने वाला भी लगाया जाएगा। सफाई कर्मचारियों के अलावा अन्यों के लिए मंजूरी ली जाएगी। पूरे अस्पताल में एसी चलवा दिया गया है। नागरिक अस्पताल के कर्मचारियों से फिलहाल सफाई कराई जा रही है। डिस्पेंसरी व पर्ची बनाने वाले विभाग को जल्द ही नए भवन में शिफ्ट किया जाएगा। - डॉ. लाल सिंह उपसिविल सर्जन