शहर के नागरिक अस्पताल को 100 की बजाय 200 बेड का बनाने की घोषणा व चिकित्सकों व पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति के बाद भी जिम्मेदार निर्माण के लिए जगह फाइनल नहीं कर पाए हैं। जानकारी के अनुसार शहर से 10 किमी. दूर गांव श्योराज माजरा में अस्पताल निर्माण मंथन चल रहा है, लेकिन सवाल है कि शहर के लोग ओपीडी क्या इतनी दूर पहुंच पाएंगे। कहीं ट्रॉमा सेंटर की तरह ही 200 बेड के अस्पताल की स्थिति न बन जाए। हालांकि दूरी का हवाला देते हुए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी प्रशासन को शहर के सेक्टर-20 व 21 में ही निर्माण करने की बात कह रहे हैं।
ट्रॉमा सेंटर निर्माण के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से दिल्ली-जयुपर हाईवे पर खेड़ा बार्डर के पास प्रस्ताव दिया गया था, स्वास्थ्य विभाग का मानना था कि हाईवे पर हादसें अधिक होते हैं। इसको देखते ट्रॉमा सेंटर भी हाईवे पर ही बनना चाहिए। लेकिन राजनीतिक दखल के बाद उस समय ट्रॉमा सेंटर को शहर के बीच में बना दिया, उसका असर यह हुआ कि आज तक ट्रॉमा मेें एक भी चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो पाई है। नागरिक अस्पताल के डॉक्टरों के भरोसे ही ट्रॉमा चलाया जा रहा है। ऐसे में यदि शहर का नागरिक अस्पताल श्योराज माजरा में बना दिया जाता है तो लोगों उसका पूरा लाभ मिलने में संदेह है।
13 डॉक्टर व 52 स्टाफ नर्स पोस्ट भरने की मिली अनुमति
करीब 6 माह पहले 100 से 200 बेड का अस्पताल करने की घोषणा की गई थी, लेकिन तीन जनवरी को प्रशासनिक मंजूरी दी गई थी। ऐसे में अब पहले के अलावा अस्तपाल में 13 डॉक्टर व 52 स्टाफ नर्स की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। बता दें कि स्टाफ नर्स मेडिकल क्षेत्र में रीढ़ की हड्डी के समान होती हैं, लेकिन अस्पताल में जरूरत के मुकाबले स्टाफ नर्स की संख्या बेहद कम है, लेकिन अब 52 स्टाफ नर्स की संख्या बढ़ने से सुधार की उम्मीद की जा सकती है। नई प्रस्तावित पोस्ट में दो एसएमओ, एक डेंटल सर्जन, दो फार्मासिस्ट, चार लैब टेक्निशयन, एक रेडियोग्राफर, पांच ओटी सहायक, दो क्लर्क व एक सीनियर स्टेनोग्राफर शामिल है।