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ब्यूरो बावल।

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डंपिंग यार्ड के विरोध में 11 गांवों की पंचायत, 15 दिन का दिया अल्टीमेटम
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अमर उजाला ब्यूरो
बावल। दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर गांव रामसिंहपुरा में बनाए गए रेवाड़ी और बावल नगर पालिका के डंपिंग यार्ड को लेकर 11 गांवों की पंचायतों ने मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को यार्ड परिसर में दिया जा रहे धरनास्थल पर 11 गांवों की पंचायत का आयोजन किया गया। पंचायत में वक्ताओं ने कहा कि डंपिंग यार्ड की वजह से न केवल शहर का कचरा यहां आ रहा है, वहीं डंपिंग यार्ड की वजह से गांव के अंदर भी रहना मुश्किल हो गया है। इसके बाद पंचायत प्रतिनिधियों ने उपायुक्त अशोक कुमार शर्मा से मुलाकात करके उनसे यार्ड को स्थानांतरित करने की मांग की। ग्रामीणों के तीखे तेवर देखते हुए प्रशासन ने इस मामले में 15 दिन का समय मांगा है। इसके बाद ग्रामीणों ने शुरू किया धरना स्थगित कर दिया। इस दौरान पंचायत ने 15 दिन में समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
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उपायुक्त के साथ एक घंटा तक चली बैठक
शहर के साथ बावल और धारूहेड़ा में स्वच्छता सर्वेक्षण होना है, जिसकी वजह से बड़ी मात्रा में कचरा यार्ड में पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा डंपरों को रोकने के बाद प्रशासन के पास ग्रामीणों को मनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। सुबह यार्ड परिसर में पंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों ने साफ कहा कि यहां पर डंपिंग यार्ड किसी भी सूरत में नहीं रहने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यार्ड में बड़ी मात्रा में कचरा डाला जा रहा है जबकि इसके निस्तारण की कोई प्रक्रिया नहीं है। इसको आग लगाने की वजह से इससे प्रदूषण बढ़ रहा है। इसके अतिरिक्त इसकी वजह से गांव तक भी इसकी बदबू आने लगी है, जिससे इसके स्थानांतरण के अलावा कोई विकल्प नहीं है। ग्रामीणों ने कहा कि प्रशासन यहां पर केवल रेवाड़ी ही नहीं दूसरे जिलों का भी कचरा मंगा रहा है, जिसकी वजह से तो हालात आने वाले दिनों में और भी खराब हो जाएगा। पंचायत के बाद गांव के लोग उपायुक्त से मिलने पहुंचे और उनकी उपायुक्त के साथ लगभग एक घंटा तक बैठक चली। बैठक में उपायुक्त ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि 15 दिन बाद यार्ड को यहां से स्थानांतरित कर दिया जाएगा और धारूहेड़ा, महेंद्रगढ़ और नारनौल का कचरा भी यहां नहीं डाला जाएगा। इसके लिए एसडीएम जितेंद्र कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उधर, उपायुक्त के आश्वासन के बाद धरना स्थल पर हो रही पंचायत व धरना को आगामी 15 दिन के लिए स्थगित कर दिया है। इस अवसर पर रामसिंहपुरा के सरपंच कर्णसिंह, ओढ़ी के सरपंच गजेंद्र सिंह, साबन के सरपंच चरण सिंह एडवोकेट, बावल नगर पालिका के उप चेयरमैन चेतराम रेवाडिया, केशवपुर के सरपंच महेश कुमार, चांदूवास के सरपंच सुभाष, खेड़ी डालूसिंह के सरपंच चंदन सिंह व पार्षद हीरासिंह सहित अन्य उपस्थित रहे। इसके बाद ग्रामीणों ने पार्षद रोहन यादव की अगुवाई में राव नरबीर सिंह से भी मुलाकात करके समस्या से अवगत कराया।
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मृत गोवंश मिलने पर अज्ञात पर हो चुका है केस
पहले मामला मृत गोवंश मिलने का था। शनिवार को डंपिंग यार्ड में तीन गायों के मृत मिलने के बाद प्रशासन ने उनके संबंध में अज्ञात पर मामला दर्ज किया था। इसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा शांत हो गया था। लेकिन अब ग्रामीणों की ओर से यार्ड के ही विरोध में उतरने के बाद प्रशासन के सामने विकट स्थिति हो गई है।
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कहां जाएगा शहर और बावल का 65 टन कचरा
फिलहाल प्रशासन ने 15 दिन के लिए कचरे की समस्या को टाल लिया है, लेकिन ग्रामीण अभी पूरी तरह से यार्ड को यहां से स्थानांतरित करने की मांग पर अड़े हैं। इस समय रेवाड़ी शहर का प्रतिदिन का करीब 40 से 45 टन और बावल नगर पालिका का करीब 15 टन कचरा यहां पहुंचता है। अभी धारूहेड़ा का कचरा यहां नहीं डाला जा रहा है। यदि प्वाइंट को यहां से स्थानांतरित किया जाता है सबसे बड़ी मुश्किल नए प्वाइंट को लेकर होगी और दूसरी सबसे बड़ी बात इतने कचरे के लिए कम से कम 30 से 35 एकड़ जमीन की जरूरत होगी जो कि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में शहर के कचरे को खपाना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
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कचरे से खाद और ईंटें बनाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में
हालांकि इस प्वाइंट पर कचरे का निस्तारण करने के लिए खाद और ईंटें बनाने की मशीन लगाने का प्रस्ताव था लेकिन अभी तक इनकी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी है। इस वजह से फिलहाल यहां कचरे के ही ढेर लग रहे हैं।
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हम ग्रामीणों की समस्या को लेकर पूरी तरह से गंभीर हैं और उनकी समस्या का समाधान अवश्य किया जाएगा। हालांकि गांव से यार्ड काफी दूर है, लेकिन बदबू नहीं उठे। इसके लिए वहां पर दवाओं का छिड़काव कराने के साथ अन्य विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। शहर के लिए कोई समस्या नहीं होगी। जल्द समाधान कर दिया जाएगा।
- जितेंद्र कुमार, एसडीएम।
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