संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जींद में रविवार को आयोजित महर्षि वाल्मीकि जयंती समारोह में जिले के कार्यकर्ताओं को जींद ले जाने के लिए 18 बसें लगाई गईं थीं। ये बसें ग्रामीण रूट की थी जिसके चलते ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
जींद भेजी गई 18 रोडवेज बसों में अधिकतर ग्रामीण रूट की थी। ऐसे में लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मौजूदा समय में शादियों का सीजन चल रहा है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना होता है। ग्रामीण क्षेत्रों से बसें हटाने के कारण अधिकतर लोग परेशान रहे।
रेवाड़ी डिपो में पहले से ही बसों की कमी बनी हुई है। बसें न मिलने पर यात्री परेशान रहे और बूथ पर बस लगने का इंतजार किया। लोग घंटों बस का इंतजार करते रहे, लेकिन बस नहीं मिली। यात्री राजेश ने बताया कि उसे धारूहेड़ा जाना था। 2 घंटे उसने बस स्टैंड पर इंतजार किया, लेकिन बस नहीं मिली। निजी बस में इतनी ज्यादा भीड़ थी कि पैर रखने तक की भी जगह नहीं थी। रामपाल ने बताया कि वह धारूहेड़ा के लिए घर से निकले थे। धारूहेड़ा में रिश्तेदारी में शादी थी। 3 घंटे बस का इंतजार किया। जब बस आई तो इतनी ज्यादा भीड़ थी कि बस में चढ़ना भी मुश्किल हो गया। ऐसे में प्राइवेट बस का सहारा लेना पड़ा। लोगों का कहना है कि प्रशासन को बसों की अतिरिक्त व्यवस्था करनी चाहिए थी। धारूहेड़ा वह रूट है, जहां पर वैसे ही लोगों को बसों के लिए जूझना पड़ता है।
इन रूटों पर बसें रहीं प्रभावित
डिपो की ओर से धारूहेड़ा रूट पर आकेड़ा, नंदरामपुर बास, महेश्वरी, भटसाना, बावल रूट पर नैचाना, प्राणपुरा, राजगढ़, भड़ंगी, भाड़ावास, डहीना, बुड़ौली, नंगली, साहरनवास, मुंडलिया, खोड़, खालेटा, कोसली रूट पर बेरली कलां, टूमना, लूखी, मंदौला, मोतला कलां आदि रूटों पर बसों को हटाया गया।