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हड़ताल के आठवें दिन सड़कों पर दौड़ी 79 रोडवेज, 50 बगैर परिचालक के, 10 नए चालक भी मिले..

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अमर उजाला ब्यूरो
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रेवाड़ी। मांगों को लेकर अब सरकार से आरपार की लड़ाई का एलान कर चुके रोडवेज कर्मियों की हड़ताल के आठवें दिन मंगलवार को जारी रहने के बाद भी हालात सुधरे नजर आए। रोडवेज प्रबंधन के प्रयासों से मंगलवार को जिले के लोकल रूटों पर 79 बसों का संचालन किया गया। जिसमें 50 बसें बिना परिचालक के चलाई गईं। जिससे यात्रियों को राहत के साथ ही फ्री में सफर करने का मौका मिला। वहीं रोडवेज को दस नए चालक मिलने से बसों संचालन में राहत मिली। वहीं दूसरे दिन भी बिजली निगम के साथ जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर रहे लेकिन इससे सेवाओं पर कोई खास असर नहीं पड़ा।
सोमवार तक जहां रोडवेज के हड़ताली कर्मचारियों की संख्या बढ़ रही थी। अब वर्कशॉप के कर्मचारियों के भी हड़ताल में शामिल होने के बाद 452 हो गई है। चालकों के हड़ताल में शामिल होने के बाद मंगलवार को आरटीए की ओर से 46 चालक मुहैया कराए गए जबकि शेष बसों का संचालन पुलिसकर्मियों और नए चालकों ने किया। मंगलवार को रोडवेज प्रबंधन 79 बसों का संचालन करने में सफल हुआ लेकिन इन 79 बसों में 50 बसों में कोई परिचालक नहीं था। जिससे इन बसों में यात्रियों ने भी मुफ्त सफर का आनंद लिया। गौरतलब है कि डिपो के तमाम परिचालक हड़ताल में शामिल हो चुके हैं जिसकी वजह से बसों का संचालन करने के साथ उनमें टिकट काटने की जिम्मेदारी भी पुलिस कर्मियों के साथ होमगार्ड की है। हालांकि मंगलवार को रोडवेज में दस नए चालक पहुंचे लेकिन परिचालकों की कमी की वजह से हालात खराब हो गए हैं।
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समर्थन में बिजली निगम और जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मी रहे हड़ताल पर
रोडवेज कर्मियों के समर्थन में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए बिजली निगम और जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी दूसरे दिन भी हड़ताल पर रहे। हालांकि दूसरे दिन मंगलवार को हड़ताल पर रहे जनस्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की वजह से पेयजल आपूर्ति पर आशिंक असर पड़ा। इसके अलावा बिजली निगम के भी कर्मचारी हड़ताल पर रहे हैं जिससे शहर के कुछ क्षेत्रों में फाल्ट की वजह से बिजली आपूर्ति प्रभावित रही। इसके अलावा जाड़रा, बुढ़पुर सहित अन्य फीडरों में रात को फाल्ट आने से सुबह तक बिजली आपूर्ति सुचारू की गई।
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रोडवेज का नुकसान एक करोड़ पार
150 बसों के बेड़े वाले रेवाड़ी डिपो को आठ दिनों की हड़ताल से अभी तक एक करोड़ रुपये से भी अधिक का नुकसान हो चुका है। रेवाड़ी डिपो को प्रतिदिन साढ़े 13 लाख रुपये की आमदनी होती है। अभी तक इन आठ दिनों में बसों का संचालन करने के बाद भी रोडवेज को केवल 50 हजार रुपये की ही आमदनी हुई है।
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