शर्त से परेशान किसान आढ़तियों के हाथों लुटने को मजबूर
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
सरकार की शर्तों से परेशान होकर किसान आढ़तियों के हाथों सस्ते भाव में सरसों बेचने को मजबूर हो रहे हैं। सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य से पांच सौ से आठ सौ रुपये सस्ते भाव में सरसों बेची जा रही है। शहर में आढ़तियों के पास रोजाना करीब तीन हजार क्विंटल सरसों आ रही है। सरकारी खरीद पर प्रतिदिन करीब एक हजार क्विंटल सरसों ही खरीदी जा रही है।
सरकार ने 19 मार्च से बिठवाना स्थित अनाज मंडी में सरसों की सरकारी खरीद शुरू कर दी थी। मंगलवार तक करीब साढे़ तीन हजार क्विंटल सरसों खरीदी गई है। शहर की अनाज मंडी में आढ़तियों के पास करीब 15 हजार क्विंटल से अधिक सरसों खरीद हो चुकी है। सरकार ने सरसों का समर्थन मूल्य चार हजार रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया हुआ है, लेकिन किसानों को सरसों बेचने के लिए शहर से करीब छह किलोमीटर दूर बिठवाना गांव की मंडी में जाना पड़ता है। बिठवाना की मंडी में किसान रोजाना अपनी सरसों लेकर पहुंच रहे हैं, लेकिन सरकार की शर्तों और निर्धारित नमी के मानक से परेशान होकर आधे से ज्यादा रोजाना बैरंग लौट रहे हैं।
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सेल्स टेक्स अधिकारी रख रहे है नजर
किसानों द्वारा आढ़तियों के पास बेची जा रही सरसों पर सेल्स टैक्स विभाग की तरफ से पूरी निगरानी रखी जा रही है। इसके बावजूद भी मिलीभगत कर सरसों को गोलमाल करने की जानकारियां आ रही हैं। सोमवार को सरसों की ढेरी में टैग नहीं होने से अधिकारियों ने मार्केट कमेटी के कर्मचारियों को लताड़ा था। सरसों की जिस ढेरी की बिक्री नहीं हुई हो उस पर टैग लगाया जाता है।
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क्या कहते हैं किसान
सरकार को सरसों के लिए कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हैफेड को बेचने के लिए जमीन के कागज तैयार करने पड़ते हैं। इसके बाद रुपया कई दिनों बाद अकाउंट में आता है। इससे उनको काफी परेशानी होती है। इस कारण आढ़तियों को बेच रहे हैं। - रामनिवासी, गांव चिल्हड़।
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सरकारी खरीद पर नमी को लेकर परेशानी उठानी पड़ती है। थोड़ी सी भी नमी होने से उन्हें रातभर अनाज मंडी में ही गुजारना पड़ता है। आढ़तियों के पास भाव कम मिल रहा है लेकिन परेशान नहीं होना पड़ता है। - सुमेर सिंह, करनावास
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आढ़तियों के पास सस्ते भाव में सरसों बेचने में उन्हें नुकसान तो है, लेकिन अपनी फसल बेचने के लिए लाइनों में नहीं खड़ा होना पड़ता। सरकारी खरीद के लिए जमीन के कागज निकलवाने के लिए अलावा अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है। - प्रताप सिंह, शहबाजपुर खालसा
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आढ़तियों के पास नमी का बहाना नहीं होता है। सरकारी खरीद में नमी आड़े आ जाती है। इसके अलावा घंटों इंतजार करना पड़ता है। पटवारियों के पास चक्कर लगाओ। सरसों बेचने के लिए गांव के नंबर का इंतजार करना पड़ता है। - रामफल, शहबाजपुर खालसा
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क्या कहते हैं मंडी प्रधान
सरकार द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य पर किसानों की सरसों खरीदनी चाहिए। किसानों को आढ़तियों के पास बेचने में नुकसान है। हालांकि किसान अपनी इच्छानुसार बेच रहे हैं। सरकार को अपनी प्रक्रिया को भी सरल करना चाहिए। - राधेश्याम मित्तल, प्रधान व्यापार मंडल नई अनाज मंडी।
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क्या कहते हैं प्रचेजर
सरसों की सरकारी खरीद 19 मार्च से शुरू हुई थी और गत दिवस अर्थात 26 मार्च तक 2668 क्विंटल सरसों की खरीद की गई थी। मंगलवार को शाम 4 बजे तक करीब 900 क्विंटल की खरीद की गई थी। यहां कुल 53 किसान आए थे, जिनमें से कई किसानों की सरसों में 18 से 22 प्रतिशत नमी होने के कारण उन्हें वापस भेजा गया है। - विरेंद्र सिंह, प्रचेजर हैफेड।
दो अप्रैल से होगी बावल की मंडी में सरसों की खरीद
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। लंबे समय से बावल की अनाज मंडी में सरसों की खरीद की मांग कर रहे किसानों के लिए राहत की खबर है। जनस्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर बनवारी लाल के प्रयासों के कारण आगामी 2 अप्रैल से बावल की अनाज मंडी में सरसों की सरकारी खरीद की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों को किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होने दी जाएगी।
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सरसों की खरीद का शेड्यूल
2 अप्रैल : मोहनपुर, आराम नगर, बेरवासल व रूद्घ
3 अप्रैल : हरचंदपुर, साबन, आंनदपुर, ओढी
4 अप्रैल : रामसिंहपुरा, बालावास, बधराणा, प्राणपुरा,
5 अप्रैल : चिराहाडा जलियावास, सुठाना, खेडा मुरार,
6 अप्रैल : केशोपुर, चांदुवास, खेडी मोतका, रघुनाथपुरा,
7 अप्रैल : बगथला, कनुका, बनीपुर, मोहम्मदपुर,
9 अप्रैल : आसरा का माजरा, खरखडी, पातुहेडा, मुकंदपुर बसई,
10 अप्रैल : अलावलपुर, रणसिंह माजरी, रानौली, गोबिंदपुर
11 अप्रैल : रायपुर, कमालपुर, किशनपुर टांकडी,
12 अप्रैल : बाद्योज, राजगढ, दुल्हेड़ा कलां, बिसनपुर
13 अप्रैल : दुल्हेडा खुर्द, नंगली परसापुर, बिदावास, नांगल शहबाजपुर