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कृषि शिखर सम्मेलन में 31 बसें जाने से 12 रूट प्रभावित, यात्री परेशान

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कृषि शिखर सम्मेलन में 31 बसें जाने से 12 रूट प्रभावित, यात्री परेशान
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रेवाड़ी। रोहतक में चल रहा कृषि शिखर सम्मेलन सोमवार को लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया। सम्मेलन में 31 बसें किसानों के ले जाने के लिए लगी होने के कारण दर्जन भर रूटों पर यात्री भटकते रहे। बसों के अभाव में लोगों ने जान जोखिम में डालकर प्राइवेट वाहनों की छतों पर बैठकर यात्रा करनी पड़ी। वहीं, बासदूदा गांव में सोमवार से शुरू हुए भैरू बाबा के ऐतिहासिक मेले के कारण शहर में यात्रियों की भारी भीड़ रही। मेले में जाने के लिए इस बार प्रशासन द्वारा अतिरिक्त बसें न लगाने के कारण दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को समस्या का सामना करना पड़ा। उधर, निजी वाहन चालकों ने रोडवेज बसें कम होने का फायदा उठाकर यात्रियों से मनमाना किराया वसूला।

वाहनों के लिए भटकते रहे श्रद्धालु
उल्लेखनीय है कि रोहतक में चल रहे तीन दिवसीय कृषि शिखर सममेलन के लिए सोमवार को करीब अठारह सौ किसानों के लिए 31 बसों गई है। तीन दिवसीय इस सम्मेलन के लिए जिले से क्रमश: 14, 20 व 31 बसें 36 सौ किसानों को लेकर गई हैं। जिसकी वजह से डिपो में रोडवेज की बसों का अभाव रहा। इसके साथ ही मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर कुंड क्षेत्र में स्थित बासदूदा गांव में तीन दिवसीय भैरू बाबा का ऐतिहासिक मेला शुरू हो गया। मेले में दिल्ली, पंजाब, यूपी व राजस्थान से सैकड़ों श्रद्धालु आ रहे हैं। लेकिन रोडवेज के बेड़े में बसों का अभाव होने के कारण हर वर्ष की तरह इस बार मेले के लिए अतिरिक्त बसों की व्यवस्था नहीं की गई है। इससे भी शहर में यात्रियों की भारी भीड़ रही। श्रद्धालु कभी बस स्टैंड तो कभी नाईवाली चौक पर वाहनों के लिए चक्कर काटते रहे।
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इन रूटों पर रहा वाहनों का अभाव
जिले के रेवाड़ी-खालेटा, रेवाड़ी-कोसली, रेवाड़ी-डहीना, कुंड-बासदूदा, रेवाड़ी-बावल, रेवाड़ी-खंडोडा, रेवाड़ी-बेरली, रेवाड़ी-गुरुग्राम व रेवाड़ी-महेंद्रगढ आदि मार्गों पर बसों का अभाव रहा। इन मार्गों पर चलने वाली बसों को रोहतक भेजा गया है। इन मार्गों में अधिकांश छोटे मार्ग शामिल हैं, जिन पर रोडवेज की बसों के अलावा आवागमन के लिए अन्य कोई विकल्प नहीं है।
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क्या कहते हैं लोग

बावल से रेवाड़ी आने के लिए बसें नहीं है। यह समस्या तीन दिन से बनी हुई है। बसों का अभाव बना हुआ है। प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जो मनमाना किराया वसूल रहे हैं। कभी-कभी तो लटक कर यात्रा करने को मजबूर होना पड़ता है।
मंजू, अहीर की ढाणी बावल।
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मेरा गांव नारनौल रोड पर है। गांव जाने के लिए तीन घंटे से नाईवाली चौक पर बस का इंतजार कर रही हूं, लेकिन कोई बस नहीं आ रही है। पूछताछ करने पर मालूम हुआ कि रोडवेज डिपो में बसों का अभाव है, जिसकी वजह से बसें नहीं आ रही हैं। इसलिए अब जीप में लटक कर घर जाना पड़ रहा है।
- प्रवीन, माजरा।
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ऐतिहासिक बाबा भैरू के मेले के लिए दिल्ली से आया हूं। दो घंटे से बस का इंतजार कर रहा हूं, लेकिन अभी तक कोई बस नहीं मिली है। इस बार प्रशासन की ओर से वाहनों की व्यवस्था भी नहीं की गई है, जिसकी वजह से परेशान होना पड़ रहा है।
- भुवनेश, दिल्ली
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तीन दिन से घर जाने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। प्रशासन की ओर से लोगों की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी चाहिए। बसों की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को परेशान होना पड़ रहा है।
- नीतिशा, बावल।

मेरा गांव रेवाड़ी से करीब 25 किलोमीटर दूर है। पढ़ाई के लिए रोजाना रेवाड़ी आना पड़ता है, लेकिन तीन दिन से बसें नहीं आने के कारण प्राइवेट वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई बार तो दोपहिया वाहन चालकों से लिफ्ट लेनी पड़ती है। यातायात के अभाव में पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
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- गोलू, गांव लुहाना


रोहतक में हो रहे कृषि शिखर सम्मेलन के लिए बसें भेजे जाने की वजह से समस्या है। मंगलवार को बाबा भैरू के मेले के लिए व्यवस्था की जाएगी। लोगों को परेशानी ना हो इसलिए बसों के चक्कर बढ़ाए गए हैं।
-बलवंत गोदारा, महाप्रबंधक रोडवेज
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