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सूर्पणखा की कटी नाक, युद्ध में मारे गए खर-दूषण

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सूर्पणखा की कटी नाक, युद्ध में मारे गए खर-दूषण
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
नई अनाज मंडी में शिव रामलीला समिति द्वारा आयोजित रामलीला में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। रामलीला में सूर्पणखा की नाक कटने, सीता हरण और जटायु वध का मंचन किया गया। रामलीला में दिखाया गया कि वनवास के दौरान पंचवटी में सूर्पणखा राम और लक्ष्मण को देखकर मोहित हो जाती है। वह इन्हें रिझाकर शादी का प्रस्ताव देती है। राम और लक्ष्मण के इनकार करने पर सूर्पणखा सीता पर हमला कर देती है। इस पर भगवान राम की आज्ञा पाकर लक्ष्मण सूर्पणखा की नाक काट देते हैं। सूर्पणखा अपनी कटी नाक लेकर भाई खर और दूषण के पास पहुंचती है। खर जिसमें एक हजार हाथियों का बल था। वह भाई दूषण और सेना के साथ राम-लक्ष्मण से युद्ध करने निकल पड़ता है। वहां इनका आपस में भयंकर युद्ध होता है। अंत में दोनों भाइयों की मौत हो जाती है। इसके बाद लंकापति रावण सीता का पंचवटी से हरण कर ले जाता है। रास्ते में इन्हें जटायु रोकने का प्रयास करता है। रावण जटायु पर हमला कर देता है। इसमें जटायु की मौत हो जाती है। देर रात तक चली रामलीला में आसपास के सैकड़ों श्रद्धालु डटे रहे।

नृत्य ने मोहा मन
रामलीला के मध्य में आधुनिक गीतों पर कलाकार की तरफ से दी गई प्रस्तुति पर मौजूद लोगों ने दांतों तले अंगुलियां दबा ली। कलाकारों ने महिला का रूप धरे फिल्मी गीतों पर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। इसकी लोगों ने प्रशंसा की। संस्था के संरक्षक दीपक मंगला ने बताया कि भारतीय जनता पाटी रेवाड़ी के जिला महामंत्री अमित यादव ने रिबन काटकर रामलीला का उद्घाटन किया। उन्होंने भगवान राम की शिक्षा अपनाने का आह्वान किया। इस मौके पर राम की भूमिका में कपिल शर्मा, लक्ष्मण की नवीन लखेरा, सीता की सागर सैनी, सूर्पणखा की श्याम बिहारी, रावण की संजीव वशिष्ठ, खर की पवन डाबला, दूषण की गिरीश सिंगला, शबरी की अशोक मुद्गिल ने भूमिका अदा की। रामलीला में व्यापार मंडल के प्रधान राधेश्याम मित्तल, भूपेंद्र गुप्ता, नरेश मित्तल, अजय मित्तल, प्रदीप गोयल, अशोक डाटा, राकेश गोयल, अनिल गर्ग, राजेश अग्रवाल, मुकेश गुप्ता, राजेंद्र अर्जिनवीस, नवल किशोर गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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सीता हरण की लीला का मंचन
रेवाड़ी। श्रीघंटेश्वर महादेव मंदिर आदर्श रामलीला के मंच पर रामजी के वन गमन से लेकर सीता हरण तक की लीला का मंचन किया गया। रामलीला का शुभारंभ पीयूष ने फीता काटकर किया। उन्होंने कहा कि रामायण से हमें जीवन के हर पहलू से शिक्षा मिलती है।
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