एक दिन में 2.5 लाख की हॉर्ट की दवा खा जाते हैं शहरवासी
अमित विश्वकर्मा
रेवाड़ी।
दुनिया भर में हृदय रोग से मरने वाले लोगों की संख्या अन्य बीमारियों की तुलना में बहुत ज्यादा है। वर्ल्ड हॉर्ट फेडरेशन के आंकड़ों के अनुसार हॉर्ट की बीमारी से दुनिया भर में करीब 17 मिलयन लोग समय से पहले ही मौत का शिकार हो जाते हैं। इस बीमारी से मरने वालों में पहले जहां 40-60 वर्ष के लोग होते थे, वहीं चिंता का विषय यह है कि अब नौजवान इस बीमारी की चपेट में सबसे ज्यादा आ रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि दो लाख आबादी वाले रेवाड़ी जैसे छोटे शहर से 100 मेडिकल शॉप और 50 अस्पतालों से प्रतिदिन करीब 2.5 लाख की हॉर्ट की दवाई खाई जा रही है। वहीं अस्पताल में प्रतिदिन पहुंचने वाले मरीजों का आंकड़ा औसतन 500 है। सबसे सुखद बात यह है कि यदि लोग खुद चाहें तो पैसा बचाने के साथ ही जिंदगी को भी बचाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दिनचर्या और खानपान में थोड़े बदलाव के साथ यदि सुबह आधे घंटे योगा किया जाए तो 90 फीसदी तक इस जानलेवा बीमारी से बचा जा सकता है।
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दस साल में बढ़े सबसे ज्यादा मरीज
तेजी से हो रहे बदल के साथ 1990 में ही हृदय रोगियों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई थी। सबसे बड़ा बदलाव बीते दस सालों में आया है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2006 में रेवाड़ी के अस्पतालों में ओपीडी का 1-2 फीसदी मरीज ही हॉर्ट की बीमारी से पीड़ित पाए जाते थे। अब इसकी संख्या बढ़कर 20 फीसदी तक पहुंच गई है। वहीं इसमें भी करीब पांच फीसदी मरीज गंभीर रोगी होते हैं। 1987 से फार्मेसिस्ट का काम कर रहे लोगों का कहना है कि पहले इक्का-दुक्का मरीज ही हॉर्ट की दवाई लेने आता था। लेकिन अब इसकी संख्या काफी बढ़ चुकी है। यदि लोगों ने समय रहते सबक नहीं लिया तो यह असमय मौतों का आंकड़ा और भी बढ़ने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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खर्च के आंकडे़ को इस तरह से समझिए
आंकड़ों के अनुसार रेवाड़ी शहर में करीब 100 और आसपास के क्षेत्र में 300 मेडिकल शॉप हैं। इसके साथ करीब 40 मेडिकल एजेंसियों से दवाइयां सप्लाई हो रही है। इसी के साथ शहर में करीब 50 अस्पतालों में विभिन्न बीमारियों के साथ हॉर्ट का उपचार किया जाता है। डॉक्टर के अनुसार हॉर्ट के साधारण एक मरीज को पांच दवाइयां दी जाती है। इनका औसत मूल्य 500 रुपये होता है। अस्पतालों में प्रतिदिन करीब 500 हॉर्ट के मरीज पहुंचते हैं। ऐसे में करीब 2.5 लाख रुपये की दवाइयां प्रतिदिन खाई जा रही है। इसी के साथ किसी को स्टॉर्क आने पर कम से कम 30 हजार रुपये का खर्च हो जाता है। जबकि छल्ला डालने की कीमत 1.5 से 2.0 लाख रूपये तक पहुंच जाती है। लेकिन सबसे बड़ी विडंबना है कि विकासशील या यूं कहें की मध्यम वर्गीय लोगों में इस बीमारी तेजी से फैल रही है।
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धूम्रपान और डायबटीज हॉर्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण
वर्ल्ड हॉर्ट फेडरेशन से मिले आंकड़ों के अनुसार भारत में आबादी का 15 फीसदी लोग धूम्रपान करते हैं। धूम्रपान ही हृदय घात से होने वाली मौत का सबसे बड़ा कारण है। इसके बाद बात करें तो देश में दुनिया के सबसे ज्यादा डायबीटिज के बीमार रहते हैं। दुनिया के 12 फीसदी डायबटिक मरीज भारत में होने के चलते हॉर्ट अटैक के सबसे ज्यादा शिकार भी यही लोग होते हैं। इसके बाद तनाव भी हॉर्ट अटैक का एक बड़े कारणों में से एक है। ब्लड प्रेशर के साथ फास्ट फूड एवं शारीरिक काम कम करने के कारण भी लोग इसकी चपेट में आते जा रहे हैं।
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योग कर बचाई जा सकती है अनमोल जिंदगी
बीमारी होने पर लोग लाखों रुपये खर्च कर देते हैं। यदि थोड़ा भी ध्यान दिया जाए तो लाखों रुपये के साथ अपने परिवार की खुशियों को बचाया जा सकता है। यह महज प्रतिदिन सुबह आधा घंटे योग कर किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिदिन सुबह आधा घंटा योग करने के साथ नसों में खून का जमाव नहीं हो पाता है। इसके साथ तनाव भी काफी हद तक कम होता है। इसके बाद धूम्रपान को छोडना भी व्यक्ति के हाथों में होता है। वहीं तैलीय खानों से बचकर भी इस बीमारी पर अंकुश पाया जा सकता है। युवाओं का फास्ट फूड को तरजीह देने से ही नव युवक हॉर्ट की चपेट में आ रहे हैं। इतना ही शहरों के साथ गांव में भी लोग इस बीमारी की गिरफ्त में आते जा रहे हैं।
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वर्जन-
तेजी से बदलती दिनचर्या ने युवाओं को बीमार कर दिया है। पहले की तुलना में शारीरिक काम कम हो गए हैं। अधिकतर समय बैठे रहने के कारण भी हॉर्ट की बीमारियां बढ़ी हैं। एक व्यक्ति जीवन में बीमारी की चपेट में आने पर लाखों खर्च करता है। लेकिन यदि वह अपनी दिनचर्या में बदलाव करे तो काफी हद तक अपने परिवार की खुशियों को बनाए रख सकता है। - डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ, रेवाड़ी
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रेवाड़ी में पहले हॉर्ट के बहुत कम मरीज आते थे। लेकिन यह आंकड़ा बहुत ज्यादा बढ़ गया है। हॉर्ट की बीमारी का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान एवं खानपान है। यदि हम सुबह योगा करने के साथ अपनी दिनचर्या एवं हैल्दी फूड का उपयोग करें तो लाखों रुपये बचाने के साथ ही असमय होने वाली मौतों से भी बचा जा सकता है। - डॉ. पवन गोयल, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ, पवन गोयल अस्पताल
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ओपीडी का बीस फीसदी तक ह्रदय रोगी अस्पतालों मे पहुंच रहे हैं। साधारण हृदय की बीमारी में एक मरीज पर औसतन 500 रुपये की दवाई एक बार मे दी जाती है। यदि लोग चाहें तो बीमारी पर पैसे की बजाय खुद अपनी बीमारी का ध्यान रख सकते हैं। इसका सीधा उपाय योगा एवं दिनचर्या में बदलाव है। छल्ले आदि डलने के बाद भी कई बार ब्लॉकेज हो जाते हैं। ऐसे में सावधानी रखनी जरूरी है। - डॉ विजयपाल यादव, वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ, विजयपाल यादव अस्पताल
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1987 से फार्मेसिस्ट का काम कर रहा हूं। पहले जहां इक्का-दुक्का हृदय रोगी दवाई लेने के लिए आता था। अब यह आंकड़ा काफी बढ़ गया है। रेवाड़ी शहर में करीब 2.5 लाख की हॉर्ट की दवाई प्रतिदिन खपत हो रही है। छोटे से शहर में इतनी बड़ी मात्रा में दवाई की खपत चिंता का विषय है। लोगों को योग एवं दिनचर्या पर ध्यान देना चाहिए। - अनिल दत्त शर्मा, संगठन मंत्री हरियाणा केमिस्ट एसोसिएशन