फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रोडवेज बसों के अभाव में प्राइवेट वाहन चालक कूट रहे हैं चांदी--

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

रेवाड़ी। रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि प्राइवेट बसों के संचालकों ने बसों की संख्या बढ़ाने के साथ ही उनके चक्कर भी बढ़ा दिए हैं। लेकिन यात्रियों का कहना है कि प्राइवेट संचालक मनमाना किराया वसूला रहे हैं। इसके अलावा सवारियों से ठसाठस होने के बाद ही बसों का संचालन किया जा रहा है। रोडवेज की बस कम चलने के कारण यात्रियों को मजबूरन प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ रहा है।
---
ग्रामीणों क्षेत्रों के रूटों मारामारी
रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के रूटों पर यात्रियों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि लंबे रूटों पर तो रोडवेज की ओर बसों का संचालन करने का प्रयास किया जा रहा है , लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के रूटों पर बसों की संख्या न के बराबर है। ऐसे में उन्हें प्राइवेट बस संचालकों व ऑटो चालक के हाथ लूटना पड़ रहा है।
विज्ञापन

-------
क्या कहते हैं परेशान यात्री
मैं यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए बावल के समीप गांव से आती हूं, लेकिन रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के कारण काफी परेशान होना पड़ रहा है। सरकार को रोडवेज कर्मियों की हड़ताल का समाधान निकालना चाहिए जिससे लोगों को होने वाली परेशानी से छुटकारा मिल सके।
-मीनू यादव, छात्रा
-----
मेरा गांव महेंद्रगढ़ रूट पर सीहा है। पढ़ाई के लिए मुझे रोजाना शहर आना पड़ता है। लेकिन बसों के अभाव के कारण विद्यार्थियों को काफी परेेशान होना पड़ रहा है। विद्यार्थी समय पर स्कूल या कालेज नहीं पहुंच रहे हैं।
-साहिल यादव, सीहा
---
बसों के अभाव के कारण लोगों को मजबूरन प्राइवेट बसों का सहारा लेना पड़ रहा है। हालांकि सरकार की ओर से रोडवेज की बसों का भी संचालन किया जा रहा है, लेकिन बसों की संख्या कम होने केे कारण प्राइवेट वाहनों में यात्रा करनी पड़ रही है।
विज्ञापन

-पूर्ण यादव, नौकरीपेशा
---
मुझे कुंडल गांव की ओर जाना था, लेकिन लंबे समय से बस नहीं आने के कारण आटों का सहारा लेना पड़ रहा है। प्राइवेट वाहन चालक निर्धारित किराए से अधिक किराया वसूल रहे हैं। इसके अलावा बाहर लटकने को भी मजबूर होना पड़ रहा है।
-अनिल कुमार, यात्री
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें