अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। केंद्र सरकार की ओर से शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना का जरूरतमंद लोगों को लाभ नहीं मिलकर ऐसे लोगों को मिल रहा है, जो इसके पात्र नहीं है। लोगों को बिना कार्ड बनवाए लौटना पड़ रहा है। नागरिक अस्पताल में रोजाना 250 से 300 लोग ई-गोल्डन कार्ड बनवाने आ रहे हैं, जिनमें से 50 से 70 का रिकॉर्ड में नाम नहीं होने के कारण बैरंग लौट रहे हैं। ये लोग 20 से 25 किलोमीटर की दूरी तय कर नागरिक अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिले में रेवाड़ी के अलावा दूसरा सेंटर केवल कोसली में ही बनाया गया है।
इधर नाम नहीं होने से परेशान लोगों ने अब रोष प्रकट करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने भी शुरू कर दिए हैं। दो दिन पूर्व भी शहर की महिलाओं ने नगराधीश को ज्ञापन सौंपकर वंचित लोगों के नाम शामिल कराने की मांग की थी।
गरीब लोगों को भी निजी अस्पतालों में उपचार दिलाने की मंशा को लेकर 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुष्मान भारत योजना शुरू की थी, लेकिन यह योजना वास्तविक जरूरतमंदों के कम ही काम आ रही है। 20 से 25 प्रतिशत लोग इस योजना का लाभ पाने से वंचित हो रहे हैं, कारण यह है कि ऐसे लोगों का रिकॉर्ड में नाम ही नहीं है। नागरिक अस्पताल में इस योजना के तहत अभी तक तीन हजार से अधिक लोगों के ई-गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। अस्पताल में रोजाना सैकड़ों लोग कार्ड बनवाने आ रहे हैं। कार्ड बनवाने के इच्छुक लोग सुबह पांच बजे ही लाईन में लग जाते हैं। ऐसे लोगों को उस समय बहुत दुख होता है, जब नंबर आने पर उनसे कहा जाता है कि रिकार्ड में उनका नाम ही नहीं है।
क्यों बैरंग लौट रहे हैं लोग
जानकारी में आया है कि भारत आयुष्मान योजना का लाभ वर्ष 2011 में हुई सर्वे के आधार पर दिया जा रहा है। 2011 के बाद बीपीएल में बहुत से लोगों के नाम जोड़े गए हैं, जो अब रिकॉर्ड में नाम नहीं है। आशंका यह भी जताई जा रही है कुछ नाम 2011 की सर्वे में ही कर्मचारियों की लापरवाही के कारण रह गए थे। इसलिए वे रिकॉर्ड में नहीं है और बीपीएल में होते हुए भी लोगों को बिना कार्ड बनवाए लौटना पड़ रहा है।
सौंपे जाने लगे हैं प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन
आयुष्मान भारत योजना के बनाए जाने वाले पांच लाख रुपये तक स्वास्थ्य लाभ के कार्ड से वंचित रहे लोगों में रोष पनपने लगा है और वे रिकार्ड में नाम दर्ज कराने की मांग को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने लगे हैं। गत दिवस शहर के विभिन्न मौहल्लों की महिलाओं ने नगराधीश डॉ. विरेंद्र सिंह को ज्ञापन सौंपा, जिसमें कहा गया कि वे बीपीएल में है, बावजूद इसके उनका नाम आयुष्मान भारत योजना में शामिल नहीं है, जबकि ऐसे लोगों के कार्ड बन गए हैं, जो पूरी तरह से अपना उपचार महंगे से महंगे अस्पताल में कराने में सक्षम है।
सेंटरों की कमी कर रही है लोगों को परेशान
आयुष्मान योजना के तहत ई-गोल्डन कार्ड बनाने के लिए अभी तक दो सेंटर बनाए गए हैं। पहला सेंटर शहर के नागरिक अस्पताल व दूसरा कोसली में है। धारूहेड़ा, बावल व जिले के अन्य 20 किलोमीटर तक के गांव के लोगों को रेवाड़ी में ही कार्ड बनवाने के लिए आना पड़ता है, जिससे उन्हें परेशानी होती है।
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सेंटर बढ़ाने के लिए अतिरिक्त उपायुक्त से बात की जाएगी। यदि ऐसा संभव हुआ तो सेंटर जरूर बढ़ाए जाएंगे, ताकि लोगों को परेशानी नहीं हो। उक्त योजना के लिए 2011 की सर्वे के अनुसार नाम लिए गए हैं। लोगों की शिकायतों को अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय में भेज दिया गया है। इस दिशा में जरूर कुछ कदम उठाए जाएंगे।
-वीरेंद्र सिंह सीटीएम रेवाड़ी